वीर महाराणा प्रताप की निजी जिंदगी पर एक नजर, अपने जीवनकाल में की थीं 11 शादियां...

वीर महाराणा प्रताप की निजी जिंदगी पर एक नजर, अपने जीवनकाल में की थीं 11 शादियां...

रेनू तिवारी | Jun 6 2019 2:44PM

महान कौन अकबर या वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप? हमेशा से ही इतिहासकारों पर इस तरह के सवाल उठते आये हैं। समाज का एक तबका महाराणा प्रताप को महान मानता हैं तो वहीं इतिहासकारों ने अपने इतिहास में मुगल बादशाह अकबर को महान बताते है। इस पर लंबी- लंबी बहस होती है, तर्क वितर्क दिये जाते है। लेकिन इस बात जो हमेशा से सच रही है वो ये कि उदयपुर और मेवाड में सिसोदिया राजपूत राजवंश में जन्मे महाराणा प्रताप वीर थे। महाराणा प्रताप की जीवन-गाथा साहस, शौर्य, स्वाभिमान और पराक्रम का प्रतीक है, जिससे देशवासियों को सदा राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा मिलती रहेगी। 

- आइये जानते हैं इतिहासकारों के और किताबों के अनुसार वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जिंदगी की कुछ दिलचस्प बातें- 
 
- हमेशा से कंफ्यूजन रहा है कि महाराणा प्रताप की जयंती और जन्म स्थान को क्या हैं। इस बात को लेकर दो विचार हैं। पहले विचार के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआ था। ऐसा इस लिए कहा जाता है क्योंकि महाराणा उदयसिंह एवम जयवंताबाई का विवाह कुंभलगढ़ महल में हुआ। दूसरी तथ्य के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म पाली के राजमहलों में हुआ। इस तर्क के पीछे कहा जाता रहा है कि महाराणा प्रताप की मां जयवंता बाई थी जो पाली के सोनगरा अखैराज की बेटी थी। 
 
-जैसे आज बच्चों को माता-पिता या बड़े प्यार के नाम के साथ बुलाते हैं उसी प्रकार महाराणा प्रताप को बचपन में कीका कहा जाता था।
 
-कहते हैं कि महाराणा प्रताप के पिता राणा उदयसिंह की दूसरी रानी धीरबाई अपने बेटे को मेवाड़ का राजा बनाना चाहती थी। लेकिन रानी धीरबाई का बेटा कुंवर जगमाल दुश्मन के खेमे में शामिल हो गया और मेवाड़ की जिम्मेदारी महाराणा प्रताप को दे दी गई। 
 
- महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक भी दो बार हुआ। पहली बार राज्याभिषेक गोगुन्दा नें 28 फरवरी, 1572 में हुआ। लेकिन परंपरा के अनुसार महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक कुंभलगढ़ में 1572 ही फिर किया गया। इस बार उनके राज्याभिषेक कार्यक्रम में जोधपुर का राठौड़ शासक राव चन्द्रसेन भी उपस्थित थे।
 
- महाराणा प्रताप का वैवाहिक जीवन काफी दिलचस्प था। महाराणा प्रताप ने अपनी जीवन काल में कुल 11 शादियाँ की थी उनके पत्नियों और उनसे प्राप्त उनके पुत्रों पुत्रियों के नाम है:-
 
महारानी अजब्धे पंवार- अमरसिंह और भगवानदास
अमरबाई राठौर- नत्था
शहमति बाई हाडा- पुरा
अलमदेबाई चौहान-  जसवंत सिंह
रत्नावती बाई परमार- माल,गज,क्लिंगु
लखाबाई- रायभाना
जसोबाई चौहान- कल्याणदास
चंपाबाई जंथी- कल्ला, सनवालदास और दुर्जन सिंह
सोलनखिनीपुर बाई- साशा और गोपाल
फूलबाई राठौर- चंदा और शिखा
खीचर आशाबाई- हत्थी और राम सिंह
 

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