राजीव गांधी की हत्या की पूरी कहानी, आखिर क्या हुआ था धमाके की उस भयानक रात?

राजीव गांधी की हत्या की पूरी कहानी, आखिर क्या हुआ था धमाके की उस भयानक रात?

रेनू तिवारी | May 21 2019 1:20PM

अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी मे अपनी हत्या से पहले कहा था कि 'अगर कोई अमेरिका के राष्ट्रपति को मारना चाहता है, तो यह कोई बड़ी बात नहीं होगी। बशर्ते की हत्यारा यह तय कर ले कि मुझे मारने के बदले वो अपना जीवन देने के लिए तैयार है। अगर ऐसा हो जाता हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत मुझे बचा नहीं सकती'। कुछ ऐसी ही साजिश रची गई भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की। 

दिन- 21 मई 1991

समय- रात 10 बजकर 20 मिनट 

जगह- तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में प्रधानमंत्री राजीव गांधी की रैली का मंच

10 वीं लोकसभा चुनाव 1991 के पहले चरण की वोटिंग हो चुकी थी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लिए जोर-शोर से प्रचार अभियान में जुटे थे। इस कड़ी में तमिलनाडु के श्रीपेरंबदुर में 21 मई 1991 को कांग्रेस की जनसभा होनी थी। रैली में दबरदस्त भीड़ जुट चुकी थी, रात 10 बजकर 20 मिनट का समय हो रहा था, कांग्रेस जिंदाबाद के नारों से श्रीपेरंबदुर गूंज रहा था राजीव गांधी जनसभा को संबोधित करने के लिए मंच की ओर बढ़ चले थे।

एक लगभग 30 साल की नाटी कद की सावली महिला राजीव गांधी की तरफ चंदन की माला लेकर बढ़ती है। हाथ मे माला और चेहरे पर मुस्कान लेकर महिला राजीव गांधी के पैर छूने के लिए नीचे झुकती है और एक जोरदार धमाका होता है।

एक पल में रैली का शौर संनाटे में बदल जाता है और चंद सेकेंडो के बाद चीखों का हाहाकार मच जाता हैं। धमाका इतना जबरदस्त था कि उसकी चपेट में आने वाले ज्यादातर लोगों के मौके पर ही परखच्चे उड़ गए। धमाके में जिंदा बचे लोगों की आंखे एक शख्स को ढूंढ रही थी वो दे भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी को.... लेकिन इन आखों को कुछ नहीं मिला। राजीव गांधी सबकी आंखों से ओझल हो गये थे। धमाके से मची अफरा-तफरी के बीच राजीव गांधी का तलाश शुरू हुई तब देखा गया की राजीव गांधी का शरीर पीठ के बल जमीन पर पड़ा था। जी हां केवल शरीर जमीन पर पड़ा था राजीव गांधी ता सिर धमाके में फट चुका था। मौहजूदा पत्रकारों के अनुसार राजीव गांधी के शरीर की पहचान उनके हाथ में पहनी हुई घड़ी से की गई। 

गल्फ न्यूज की संवादाता नीना गोपाल भी वहां मौजूद थी। नीना उस बम धमाके के बारे में जब भी याद करती हैं तो उनकी आखों में आंसू आ जाते है। नीना का कहना है कि धमाके होने से पहले पटाखे जैसी आवाज आ रही थी। उसके बाद ही तुरंत धमाका हुआ। धमाका इतना जोरदार था कि चारो तरफ धूल ही धूल थी कुछ ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। धूल हटते ही जैसे मैंने अपने साड़ी की तरफ देखा तो मेरी सफेद रंग की साड़ी पूरी तरह से काली हो गई थी। साड़ी पर मांस के टुकड़े और खून के छींटे पड़े हुए थे। चारो ओर हाहाकार मचा हुआ था।

सब कुछ खत्म सा हो गया था। राजीव गांधी की मौत की खबर जब सोनिया गांधी को दी गई तो वो मंजर किसी सीना भेद देने वाला था। सोनिया गांधी को राजीव गांधी की मौत की खबर उनके निजी सचिव जॉर्ज ने दी थी। जॉर्ज 10 जनपथ की तरफ भागे, चिल्लाते हुए जॉर्ज अंदर की ओर आए। उन्होंने सोनिया को हादसे के बारे में बताया। फिर सोनिया गांधी ने पहला सवाल यहीं किया 'क्या राजीव जिंदा हैं'। इसपर निजी सचिव ने कुछ जवाब नहीं दिया और सोनिया अपने आपा खो दिया, सोनिया को अस्थमा का अटैक पड़ गया था। प्रियंका जो उस वक्त महज 19 साल की थी अपनी मां की ऐसी हालत देखकर दवाई ढूंढ़ने लगी। जॉर्ज की खामोशी के बाद 10 जनपथ पर जो मंजर था वो बेहद दर्दनाक था सोनिया चीख चीख कर रो रही थी। धीरे धीरे गेस्ट हाउस के पास नेताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। सोनिया को सांत्वना देने के लिए सभी नेता मोजूद थे।

आपको बता दे राजीव गांधी ने अपने प्रधानमंत्री काल में श्रीलंका में शांति प्रयासों के लिए भारतीय सैन्य टुकड़ियों को भी वहां भेजा, लेकिन इसके नतीजे में वे खुद लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ऐलम [लिट्टे] के निशाने पर आ गए। तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में उन्हें उस वक्त बम से उड़ा दिया गया था जब वो एक चुनावी रैली को संबोधित करने जा रहे थे। 

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