पर्यटन स्थल

चले आइए पवित्र शहर अमृतसर की सैर करने, यहां का इतिहास भी लुभाता है

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 31 2018 4:12PM

जिन लोगों को घूमना बहुत पसंद होता वो अपने वीकेंड या जब भी उन्हें समय मिलता है वो घूमने निकल जाते हैं। अगर आप भी कुछ ऐसा प्लान कर रहे हैं, या परिवार के साथ कहीं जाना चाहते हैं तो पंजाब की शान अमृतसर के दर्शन कर सकते हैं। अमृतसर पंजाब का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र शहर माना जाता है। ये शहर अंग्रेजों के खिलाफ भारत की फतेह का प्रतीक है। यहां के बेटों ने हंसते हंसते देश के नाम जान कुर्बान कर दी थी। अमृतसर का जलियांवाला भारतीयों पर अंग्रेजों के अत्याचार का प्रमाण है। अमृतसर में स्वर्ण मंदिर होने के कारण ये शहर सिख धर्म के अनुयायियों के लिए भी सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। अमृतसर भले ही स्वर्ण मंदिर के लिए प्रसिद्ध हो लेकिन इस शहर में और भी कई चीजें हैं जो देखने लायक हैं। लिहाजा अगर आप कभी अमृतसर घूमने का प्लान बनाएं तो इन जगहों पर जाना न भूलें। खास बात यह है कि ये सभी जगहें स्वर्ण मंदिर के आसपास ही स्थित हैं।

स्वर्ण मंदिर या गोल्डन टेंपल

स्वर्ण मंदिर अमृतसर का दिल माना जाता है। स्वर्ण मंदिर यानी गोल्डन टेंपल को हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है और सिख धर्म का यह मुख्य देवस्थान भी है। स्वर्ण मंदिर न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में रह रहे सिख धर्म के अनुयायियों के लिए भी सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। सिर्फ सिख धर्म के लोग ही नहीं बल्कि देश और दुनिया से बड़ी संख्या में दूसरे धर्म के लोग भी हर साल कभी पर्यटक बनकर तो कभी श्रद्धालु बनकर स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने आते रहते हैं।

गोविंदगढ़ फोर्ट

अमृतसर शहर का हमारे देश के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान है। अमृतसर में ऐतिहासकि महत्वह की ढेरों जगहें हैं। हों भी क्यों न? आखिर भारत की आजादी में इस शहर का बहुत खून बहाया है। अगर आप ये शहर घूमने आ रहे हैं तो गोविंदगढ़ फोर्ट जरूर जाएं। यहां जाने के लिए शाम चार बजे का समय सबसे ठीक रहता है। फोर्ट का नजारा लेने के बाद आप यहां होने वाले सांस्‍कृतिक शो का भी आनदं ले सकते हैं। इस शो में भांगड़ा और मार्शल आर्ट्स का आयोजन होता है। यही नहीं लाइट एंड साउंड शो इसका मुख्य आकर्षण है।

जलियांवाला बाग

जलियांवाला बाग अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास का एक छोटा सा बगीचा है। 1919 में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित सैंकड़ों लोगों को मार डाला था। इस घटना ने भारत के इतिहास की धारा को बदल कर रख दिया।

वाघा बॉर्डर

स्वर्ण मंदिर से करीब 30 किलोमीटर दूर है वाघा बॉर्डर। भारत और पाकिस्तान के बीच का यह एक मात्र सड़क मार्ग है। बीटिंग रिट्रीट और चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी को देखने यहां हर रोज बड़ी संख्या में पर्यटकों के साथ ही आम लोग भी पहुंचते हैं। वाघा बॉर्डर पर हर शाम भारत की सीमा सुरक्षा बल और पाकिस्तान रेंजर्स की सैनिक टुकड़ियां इकट्ठी होती हैं। विशेष मौकों पर मुख्य रूप से 14 अगस्त के दिन जब पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस समाप्त होता है और भारत के स्वतंत्रता दिवस की सुबह होती है उस शाम वहां पर शांति के लिए रात्रि जागरण किया जाता है। उस रात वहां लोगों को एक-दूसरे से मिलने की अनुमति भी दी जाती है। इसके अलावा वहां पर पूरे साल कंटीली तारें, सुरक्षाकर्मी और मुख्य द्वार के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता।

-सुषमा तिवारी

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