भगवान महावीर की पांच प्रतिज्ञाएँ और जीवन जीने के उपदेश

भगवान महावीर की पांच प्रतिज्ञाएँ और जीवन जीने के उपदेश

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 28 2018 5:30PM

भगवान महावीर ने अपने उपदेशों के माध्यम से दुनिया का मार्गदर्शन करते हुए कुछ खास तरीके बताये हैं जिनके माध्यम से निर्वाण प्राप्त किया जा सकता है। भगवान महावीर ने जिन पांच प्रतिज्ञाओं का पालन करना सिखाया है वह निम्न हैं-

1. अहिंसा- जीवन को बचाने के लिए।
 
2. सूनृता-  सच बोलने के लिए।
 
3. अस्तेय - चोरी नहीं करने के लिए।
 
4. ब्रह्मचर्य- व्यभिचार न करने के लिए।
 
5. अपरिग्रह- संपत्ति सीमित करने के लिए।
 
भगवान महावीर ने जो उपदेश दिये हैं वह इस प्रकार हैं-
 
सत्य-
 
सत्य के बारे में भगवान ने कहा है कि जो बुद्धिमान सत्य की ही आज्ञा में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है।
 
अहिंसा-
 
भगवान कहते हैं कि हिंसा मत करो, अपने मन में दया का भाव रखो। सभी की रक्षा करो।
 
अपरिग्रह-
 
भगवान महावीर कहते हैं जो आदमी सजीव या निर्जीव चीजों का संग्रह करता है, उसको दुःखों से कभी छुटकारा नहीं मिल सकता।
 
ब्रह्मचर्य-
 
भगवान महावीर कहते हैं कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चरित्र, संयम और विनय की जड़ है। तपस्या में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है।
 
क्षमा-
 
भगवान महावीर कहते हैं कि 'मैं सब जीवों से क्षमा चाहता हूँ। जगत के सभी जीवों के प्रति मेरा मैत्रीभाव है। मेरा किसी से वैर नहीं है। सब जीवों से मैं सारे अपराधों की क्षमा माँगता हूँ। सब जीवों ने मेरे प्रति जो अपराध किए हैं, उन्हें मैं क्षमा करता हूँ।'
 
धर्म-
 
भगवान महावीर कहते हैं कि अहिंसा, संयम और तप ही धर्म है। जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं।

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