यूपीपीसीएल की उपभोक्ताओं पर भारी−भरकम बोझ डालने की तैयारी

यूपीपीसीएल की उपभोक्ताओं पर भारी−भरकम बोझ डालने की तैयारी

संजय सक्सेना | Jun 19 2019 5:39PM
उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल)अपनी तमाम खामियों के कारण हमेशा चर्चा बटोरता रहता है। विभागीय भ्रष्टाचार, बिजली चोरी, लाइन लॉस, इलेक्टि्रक सप्लाई में लगातार जारी व्यवधान, विभाग के अनाप−शनाप खर्चे, मीटर रीडिंग में गड़बड़ी और उलटे सीधे बिल उपभोक्ताओं को थमा देना बिजली विभाग की कार्यशैली का हिस्सा बन गया है। इसके अलावा मनमाने फैसलों के लिए भी यूपीपीसीएल जाना जाता है। बिजली कम्पनियों से बिजली लेते समय सस्ती बिजली खरीदने पर ध्यान देने के बजाए अन्य 'सुविधाओं' का ज्यादा ध्यान रखा जाता है। बिजली विभाग के कार्यशैली से समस्या और जन आक्रोश तब पैदा होता है, जब उक्त समस्याओं से निपटने और के बजाए पॉवर कारपोरेशन ईमानदारी से बिजली का बिल चुकाने वाले उपभोक्ताओं को दूध देने वाली गाय समझना शुरू कर देता है।
 
यह सब इसलिए बताया जा रहा है क्योंकि यूपीपीसीएल महंगी बिजली की मार झेल रहे उपभोक्ताओं को एक बार फिर बिजली की दरें और फिक्स चार्ज बढ़ाकर 440 वोल्ट का झटका देने वाला हैं। पावर कॉर्पोरेशन के प्रस्ताव को अगर मंजूरी मिल जाती है, तो शहरी घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली की न्यूनतम दर 1.30 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 6.20 रुपये प्रति यूनिट हो जाएगी। अभी घरेलू उपभोक्ताओं की न्यूनतम दर 4.90 रुपये प्रति यूनिट है। कॉर्पोरेशन ने 14 जून को बिजली दरों में 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव राज्य विद्युत नियामक आयोग को भेजा है। अब आयोग प्रस्ताव पर सुनवाई कर यह फैसला करेगा कि बिजली दरें कितनी बढ़ेंगी। बढ़ोतरी प्रस्ताव में कॉर्पोरेशन ने कमर्शियल और उद्योगों की श्रेणी की दरों में भी 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की सिफारिश की है। 
बिजली दरों में बढ़ोत्तरी का जो प्रस्ताव पावर कॉर्पोरेशन ने आयोग को जो प्रस्ताव भेजा है, उसमें शहरी के साथ ग्रामीण उभोक्ताओं की विधुत दरों में भी बढ़ोत्तरी की बात कही गई है। घरेलू शहरी उपभोक्ताओं का फिक्स चार्ज 100 रुपये प्रति किलोवाट से बढ़ाकर 110 रुपये प्रति किलोवाट करने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं, बीपीएल घरेलू उपभोक्ताओं से प्रति किलोवाट 50 रुपये फिक्स चार्ज लिया जाता है। इसे बढ़ाकर 75 रुपये प्रति किलोवाट करने की बात प्रस्ताव में है। अनमीटर्ड किसानों को 150 रुपये प्रति बीएचपी हर महीने देने पड़ते हैं। इसे बढ़ाकर 170 रुपये प्रति बीएचपी करने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं, घरेलू ग्रामीण अनमीटर्ड कनेक्शन के चार्ज भी बढ़ोत्तरी भी प्रस्ताव है। अभी इन उपभोक्ताओं को 400 रुपये प्रति किलोवाट माह की दर से भुगतान करना होता है, लेकिन प्रस्ताव मंजूर होता है तो उन्हें 500 रुपये का भुगतान करना होगा। 
 
उधर, कॉरपोरेशन के प्रस्ताव के विरोध में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद समेत कई संगठनों ने आंदोलन की तैयारी भी शुरू कर दी है। पावर कॉर्पोरेशन के प्रस्ताव पर राज्य उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाए हैं। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इसके खिलाफ जल्द आंदोलन शुरू किया जाएगा। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि एक तरफ बिजली कंपनियां फिजूलखर्ची में जुटी हैं। इनाम बांट कर स्टोर का सामान बेचा जा रहा है। 100 करोड़ से ज्यादा के कंसल्टेंट रखे गए हैं। अब इसकी भरपाई आम जनता से करने के लिए उन पर बड़ी वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इसका हर स्तर पर विरोध होगा। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि एक तरफ पहले सौभाग्य योजना में गरीबों को फ्री कनेक्शन दिया गया। अब उन उपभोक्ताओं पर भारी−भरकम बोझ डालने की तैयारी की जा रही है। गौरतलब है कि पावर कॉरपोरेशन ने सौभाग्य योजना के तहत प्रदेश में लाखों की संख्या में बीपीएल उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली का कनेक्शन दिया था। 
 
बसपा सुप्रीमों मायावती ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मायावती ने ट्वीट करके बिजली की दरों में वृद्धि करने की आलोचना की है और कहा है कि ऐसा करके सरकार बीस करोड़ जनता को आघात पहुंचाएगी। इतना ही नहीं बीएसपी चीफ ने लिखा कि यह प्रस्ताव सौभाग्य योजना को दुर्भाग्य योजना में बदल देगी। राष्ट्रीय लोकदल ने भी बिजली की कीमत बढ़ने की संभावना को देखते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं, केंद्र सरकार में भाजपा के सहयोगी जनता दल युनाइटेड के प्रदेश प्रवक्ता प्रो. केके त्रिपाठी ने भी प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने इसे सरकार के लिए आत्मघाती कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव वापस न हुआ तो किसानों के लिए जेडीयू राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने को बाध्य होगा।
 
पावर कॉर्पोरेशन ने बीपीएल श्रेणी के लिए जो प्रस्ताव दिया है, अगर वह लागू होता है, तो 50 यूनिट से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करने वाला उपभोक्ता शहरी घरेलू की श्रेणी में आ जाएगा। अभी तक बीपीएल उपभोक्ता के लिए यह सीमा 100 यूनिट है। 
 
बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी को पावर कॉरपोरेशन समय की मांग बता रहा है। कॉरपोरेशन के चेयरमैन के मुताबिक, उपभोक्ता तक बिजली पहुंचाने की लागत करीब 7.66 रुपये प्रति यूनिट आती है। यही वजह है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि नवंबर, 2017 से खरीदी जा रही बिजली की कीमत में 66 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई है। कोयले की कीमत में 12 फीसदी जबकि ट्रांसमिशन चार्जेस में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, पर्यावरणीय मानकों को प्राप्त करने के उद्देश्य से फिक्सड कॉस्ट 9 फीसदी बढ़ी है। इसके अलावा नवंबर−2017 से बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। इसकी वजह से बिजली खरीद की देनदारियां 5900 करोड़ रुपये बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि बिजली के कुल उपभोग का 59रू हिस्सा शहरी, ग्रामीण और   कृषि उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग किया जाता है। इस श्रेणी के उपभोक्ताओं का टैरिफ पहले ही सब्सिडाइज्ड है। इसलिए घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में बढ़ोतरी की जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि नया बिजली मूल्य टैरिफ तय होने में दो महीने का समय लग सकता है। पहले राज्य विद्युत नियामक आयोग प्रस्ताव को मंजूर करेगा। इसके बाद प्रस्ताव के हर पहलू पर सुनवाई होगी, जिसमें उपभोक्ताओं के प्रतिनिधि अपना मत देंगे। इसके बाद आयोग बिजली दर बढ़ोतरी प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेकर इसे लागू करेगा। इसमें योगी सरकार की भूमिका भी अहम होगी।
 
- संजय सक्सेना
 

रहना है हर खबर से अपडेट तो तुरंत डाउनलोड करें प्रभासाक्षी एंड्रॉयड ऐप


Disclaimer: The views expressed here are solely those of the author in his/her private capacity and do not necessarily reflect the opinions, beliefs and viewpoints of Prabhasakshi and do not in any way represent the views of Prabhasakshi.