संविधान की प्रतियां फाड़ने वाले इन दोनों माननीयों पर कार्रवाई का इंतजार है देश को

संविधान की प्रतियां फाड़ने वाले इन दोनों माननीयों पर कार्रवाई का इंतजार है देश को

नीरज कुमार दुबे | Aug 6 2019 3:55PM
देश की संसद और विधानसभाएं लोगों की समस्याओं का समाधान निकालने, विधेयकों पर चर्चा और उसे पारित कर कानून बनाने के लिए होती हैं। यहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों को ही अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और उन्हें मौका भी मिलता है। विपक्ष का दायित्व है कि वह सरकार के जनविरोधी फैसलों का विरोध करे और अपनी आवाज बुलंद करे। लेकिन यह विरोध सदन में नियमों के दायरे में ही होना चाहिए, संसदीय कार्यवाही के नियमों की परवाह नहीं करना सर्वथा गलत है। हमारी संसद और विधानसभाओं में जो भी घटित हो रहा होता है उस पर देश की नजरें रहती हैं और अकसर यह देखकर निराशा होती है कि कभी जनप्रतिनिधि एक दूसरे पर कुर्सी फेंकते हैं, कभी माइक तोड़ डालते हैं, कभी कागज के गोले बनाकर अध्यक्ष की ओर उछाले जाते हैं तो कभी विधेयकों की प्रतियां दूसरों से छीन कर सदन में फाड़ दी जाती हैं। अधिकांशतः सदस्यों के ऐसे व्यवहार पर सदनों की ओर से कार्रवाई भी की गयी हैं लेकिन 5 अगस्त 2019 को देश की संसद के ऊपरी सदन राज्य सभा में जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था और यह निराशाजनक है कि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है।
राज्यसभा में पीडीपी के दोनों सदस्यों नजीर अहमद लवाय और मीर मोहम्मद फयाज ने सदन में पेश, जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने संबंधी एक संकल्प और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों- जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित करने के प्रावधान वाले विधेयक का विरोध किया। इस संकल्प और विधेयक का विरोध तो कई अन्य दल भी कर रहे थे लेकिन पीडीपी सांसद लवाय और फयाज विरोध करते-करते सभी सीमाएं लांघ गये और अपनी अपनी बांह पर काली पट्टी बांधे हुए इन दोनों माननीयों ने पहले तो संकल्प की प्रतियां फाड़ कर हवा में उछाल दीं फिर उसके बाद संविधान की प्रतियां भी फाड़ दीं। विरोध जाहिर करते हुए लवाय ने तो अपना कुर्ता भी फाड़ लिया। कुछ सांसदों ने फयाज तथा लवाय को रोकने का प्रयास किया लेकिन संविधान के अनुपालन की शपथ लेने वाले इन माननीयों ने इसकी परवाह नहीं की। यह दोनों इस बात को भूल गये कि भारतीय लोकतंत्र का सबसे पवित्र ग्रंथ और आत्मा हमारा संविधान है, जिसकी प्रति को क्षतिग्रस्त कर उन्होंने अक्षम्य अपराध किया है और सभी भारतीयों का मन दुखाया है।
The Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 (Act No. 69 of 1971) में क्रम संख्या 2 में साफ-साफ लिखा है कि भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय संविधान का किसी भी प्रकार से अपमान करने, उसे क्षतिग्रस्त करने, उसके खिलाफ लिखने, बोलने पर तीन साल की सजा या जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है। इसलिए नजीर अहमद लवाय और मीर मोहम्मद फयाज पर भी इन धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की जानी चाहिए, इन्होंने तो संविधान की प्रतियां संसद के भीतर फाड़ कर बहुत बड़ा दुस्साहस भी दिखाया है।
 
 
 देश को इंतजार है कि इन दोनों सांसदों पर क्या कार्रवाई की जाती है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज, भारतीय संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए चाहे वह साधारण व्यक्ति करे या फिर कोई जनप्रतिनिधि। लवाय और फयाज ने संसदीय मर्यादाओं का जिस तरह अपमान किया है उसके लिए उन्हें कड़ा सबक नहीं सिखाया गया तो सदनों में इस तरह की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
 
-नीरज कुमार दुबे
 

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