राहुल के 52 खरे वादे अगर नहीं हुए पूरे तो नरेंद्र मोदी से ज्यादा होगी फजीहत

राहुल के 52 खरे वादे अगर नहीं हुए पूरे तो नरेंद्र मोदी से ज्यादा होगी फजीहत

रजनीश कुमार शुक्ल | Apr 11 2019 2:48PM
राहुल गांधी ने पिछले दिनों जो 'जन आवाज' घोषणा पत्र जारी किया था, उसका लोकसभा चुनाव में कुछ न कुछ असर जरूर होगा। राहुल ने अपने घोषणा पत्र में जो 52 वादे किए हैं और उन्होंने दावा किया है कि हम जो घोषणाएं कर रहे है उनको पूरा करेंगे, यह भी कहा कि कोई ऐसे वादे नहीं किये जिसे पूरा न किया जा सके। इतनी बड़ी घोषणाएं करना कोई आम बात नहीं लेकिन यदि कांग्रेस की सरकार बनती है और राहुल अपने वादों में खरे नहीं उतरते तो नरेन्द्र मोदी के 15 लाख रुपये खाते में देने वाले घोषणा की तरह कोई भी बड़ा वादा फेल हुआ तो राहुल गांधी की नरेन्द्र मोदी से ज्यादा फजीहत हो जायेगी। वैसे तो राहुल गांधी ने गरीब और किसानों के साथ नौजवानों को नौकरी देने का वादा कर दिया। इतना ही नहीं एनडीए सरकार की कई योजनाओं को बदलने का भी ऐलान कर दिया।
कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी ने एक चुनावी रैली में कहा था कि हमारी सरकार आई तो हम नीति आयोग को निरस्त कर देंगे और इसकी जगह योजना आयोग का गठन करेंगे। यह भी कहा था कि नए योजना आयोग में प्रसिद्ध अर्थशास्त्रीयों और वित्तीय विशेषज्ञों का एक छोटा संगठन होगा, जिसकी सहायता के लिए उच्च गुणवत्ता वाले विद्वानों और सहायकों की टीम होगी, जिनकी संख्या अधिकतम 100 होगी। इतना ही नहीं धारा 124ए देशद्रोह कानून को खत्म करने का ऐलान कर दिया साथ ही धारा 499 को हटाकर मानहानि को दिवानी अपराध बनाने का वादा कर दिया। भाजपा सरकार ने जो नागरिकता संशोधन विधेयक लाया था उसे तुरंत वापस लेने का भी फैसला ले लिया। कांग्रेस को यह तो देखना ही चाहिये था कि यह घुसपैठियों के लिए लाया गया था लेकिन क्या कहा जाये यह सत्ता की लालच है या वर्चस्व की लड़ाई जिसमें किसी भी तरह जीत हासिल करना है, या विरोधियों को नीचा दिखाना। 
 
कश्मीरियों को साधने के लिए धारा 370 को न बदलने का भी दावा किया। क्यों कि भाजपा सरकार जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35ए को खत्म करना चाहती है। इसका काफी विरोध भी हो रहा था। आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट (अफस्पा) में भी बदलाव का वादा कर रही है। मुस्लिमों को साधने के लिए राहुल गांधी ने वक्फ संपत्तियों (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) विधेयक, 2014 को फिर से पेश करने का ऐलान किया और यह कहा कि इसे फिर से पारित किया जायेगा एवं वक्फ संपत्तियों पर कानूनी ट्रस्टियों का अधिकार बहाल किया जायेगा। दिल्लीवालों को साधने के लिए दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की घोषणा कर दी। 
 
राहुल गांधी ने लोक-लुभावन वादे तो कर दिये लेकिन देखा जाये तो यह सब पाँच साल में पूरा करना सम्भव नहीं है। आजादी के 72 साल में सबसे ज्यादा शासन करने वाली कांग्रेस ने अब तक गरीबों के लिए मनरेगा व खाद्य सुरक्षा के अलावा कोई ठोस योजना नहीं ला पायी अब चुनाव होने को हैं तो वादों की झड़ी लगी हुई है। सभी पार्टियां भी देखा-देखी बड़े-बड़े वादे करेंगी लेकिन पूरा कौन करेगा यह कहना मुश्किल है। कांग्रेस अपने ही आधार पहचान पत्र को सीमित करने पर तुली हुई है और इस विधेयक में संशोधन करने की बात कर रही।  जबकि इस योजना को कांगेस ने ही लाया था जिसको भाजपा ने अमल में लाया और सब्सिडी से लेकर कई योजनाओं में अहम रोल अदा कर रही है। इससे काफी हद तक पारदर्शिता बढ़ी है। कांग्रेस ने जमीनी हकीकत और किसानों, गरीबों की जरूरत के बजाये घोषणा पत्र को आकर्षक बनाया। इसमें कई ऐसी चीजें हैं जिसमें विरोधाभास नजर आ रहा है।
 
राहुल ने केंद्र सरकार की विदेश नीति को राष्ट्रहित के लिए खिलवाड़ बताया और कहा कि हम देश के लिए इस प्रकार की हानिकारक नीतियों और घटनाओं को बदलकर नये सिरे से विदेश नीति विशेषज्ञों पर विश्वास दोहरायेंगे। सीमाओं को सुरक्षित बनायेंगे। राहुल गांधी ने बेरोजगारी के लिए मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पाँच साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी बढ़ी है। 22 लाख सरकारी पद खाली पड़े है जो हम 2020 तक भर देंगे और पंचायती राज में 10 लाख पद खाली पड़े हैं जिसमें युवाओं को नौकरी देंगे।
राहुल गांधी यदि किसानों को बेहतर सुविधा देने की बात करते तो कुछ और बात थी क्योंकि खेती और किसानों को बेहतर सुविधा और उर्वरक, पानी, बिजली, मण्डी, भण्डारण जैसी सुविधाएं मुहैया कराने की बात करनी चाहिये थी। सबसे बड़ी बात यह है कि सिर्फ कर्जमाफी या 72 हजार रुपये सालाना देने से ही गरीब किसानों को राहत नहीं मिल सकती। किसान खेती छोड़ किसी अन्य व्यवसाय की ओर जाने लगेगा। समय की मांग है कि बिचौलियों की जगह किसानों को बेहतर मूल्य मिलना चाहिये। अपने आप उनकी समस्याएं दूर हो जायेंगी।
 
ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस यह देखने को तैयार नहीं कि सब्सिडी और रियायत के सहारे जनता को संतुष्ट करने वाली नीतियों के देश और दुनिया में कैसे दुष्परिणाम हुए। कांग्रेस के घोषणा पत्र में यह भी साफ दिख रहा है कि सब्सिडी बांटकर या रियायतें देकर और कर्ज माफी जैसी योजनाएं चलाकर देश को प्रगति पर लाया नहीं जा सकता तभी अपने पुराने तौर-तरीकों पर ही अधिक भरोसा करती नज़र आ रही है। तभी मनरेगा पर ज्यादा ध्यान देने की बात कर रही अब 150 दिन का काम देने की गारंटी दे रही। राहुल गांधी ने एनडीए सरकार को मात देने के लिए वादों की झड़ी लगा दी और अपने वादों से लोगों को साधने का अच्छा प्रयास किया है। लोकसभा चुनाव को राष्ट्रीयता बनाम रोजगारहीनता कर दिया है। अब देखना है कि इसका असर चुनाव पर कितना पड़ता है।
 
रजनीश कुमार शुक्ल
 

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