विपक्षी नेताओं को लाने की बात करके अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं राहुल: राज्यपाल

विपक्षी नेताओं को लाने की बात करके अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं राहुल: राज्यपाल

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 14 2019 9:30AM

जम्मू। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राज्य का दौरा करने के लिए पूर्व शर्तें लगाने को लेकर मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना की और आरोप लगाया कि गांधी विपक्षी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल लाने की बात कर अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। कश्मीर में हिंसा की खबरों संबंधी गांधी के बयान पर मलिक ने सोमवार को कहा था कि वह राहुल गांधी को घाटी का दौरा करने और जमीनी हकीकत जानने के लिए एक विमान भेजेंगे।

राज्यपाल ने एक बयान में कहा कि गांधी ने यात्रा के लिए कई शर्तें रखी थीं जिनमें हिरासत में बंद मुख्यधारा के नेताओं से मुलाकात भी शामिल है। कांग्रेस ने राज्य का दौरा करने के प्रस्ताव पर ‘‘यू-टर्न लेने’’ के लिए राज्यपाल पर पलटवार किया और कहा कि उन्हें अपनी बात पर डटे रहना चाहिए। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कहा, ‘‘राज्यपाल यू-टर्न ले रहे हैं। उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि हर कोई स्वयं घाटी में आकर स्थिति का आकलन कर सकता है।’’

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कांग्रेस ने कहा, ‘‘उन्हें अपने शब्दों पर डटे रहना चाहिए और बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल को बिना रुकावट के जम्मू-कश्मीर के दौरे की अनुमति देनी चाहिए।’’ मलिक ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता को कभी इतनी पूर्व शर्तों के साथ आमंत्रित नहीं किया था।  गांधी ने मंगलवार को मलिक के राज्य का दौरा करने के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया था लेकिन कहा था कि उन्हें विमान की जरूरत नहीं है और वह तथा अन्य विपक्षी नेता भी यात्रा करेंगे। कांग्रेस नेता ने ट्वीट करके राज्यपाल से अनुरोध किया था कि उन्हें लोगों और जवानों से मिलने की आजादी दी जाए।

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कश्मीर में हिंसा पर गांधी के बयान पर मलिक ने कहा, ‘‘राहुल गांधी कश्मीर के हालात के बारे में फर्जी खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं जो संभवत: सीमापार से प्रसारित की गयी हैं। हालात शांतिपूर्ण हैं और नहीं के बराबर घटनाएं हुई हैं।’’ राज्यपाल ने कहा कि राहुल गांधी विभिन्न भारतीय टीवी चैनलों को देखकर खुद पता लगा सकते हैं जिन्होंने कश्मीर घाटी के सही हालात बयां किये हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वह आज उच्चतम न्यायालय में सरकार द्वारा रखे गये विस्तृत पक्ष को भी देख सकते हैं। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई की और इसे सरकार पर छोड़ा है।’’

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