जब अपने हुए पराए... जिलों के नाम बदलने से नाराज हुए योगी के मंत्री

जब अपने हुए पराए... जिलों के नाम बदलने से नाराज हुए योगी के मंत्री

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 14 2018 5:57PM
लखनऊ। राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार के शहरों के नाम बदलने के कदम पर निशाना साधते हुये समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि वर्तमान सरकार में विकास के सारे कार्य रूके पड़े हैं, केवल नाम बदलने का काम हो रहा है । उन्होंने कहा कि यही नहीं प्रदेश सरकार के सहयोगी दलों के मंत्री भी नाम बदलने को लेकर अपनी ही सरकार पर निशाने साध रहे हैं । अखिलेश ने आज ट्वीट कर कहा कि 'बंद पड़े हैं सारे काम, बिखरा पडा़ सब सामान, तरक्की के रूके रस्ते, बदल रहे बस नाम ।' उन्होंने कुछ अधूरे पड़े विकास कार्यो की फोटो भी टि्वटर पर डाली है।
 
वहीं प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश के कबीना मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने नाम में बदलाव को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि नाम बदलने के लिए खर्च की जा रही धनराशि जन कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर खर्च की जाती तो देश के हालात में बदलाव आता। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में दिव्यांग जन सशक्तिकरण मंत्री राजभर ने भी ट्वीट के जरिये आज योगी सरकार पर तीखा हमला किया ।
 
उन्होंने कहा है कि 'भारत का आधार उसकी गंगा जमुना तहजीब है। जितना खर्च नाम बदलने पर हो रहा है , उतना खर्च करके शिक्षा, रोजगार,स्वास्थ्य व गरीबों के कल्याण में तेजी लायी जाती तो भारत देश का नक्शा कुछ और ही होता ।' उन्होंने ट्वीट के अंत में लिखा है कि 'दिवाली में अली बसे ,राम बसे रमजान, ऐसा होना चाहिये अपना हिंदुस्तान।'  इससे पहले कांग्रेस ने भी राज्य सरकार के शहरों के नाम बदलने के फैसले की आलोचना की थी । पार्टी के एक नेता ने कहा था कि शहरों के नाम बदलना इतिहास के साथ खिलवाड. करना है ।
 
इससे पहले रविवार को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्‍यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सरकार द्वारा फैजाबाद और इलाहाबाद का नाम बदले जाने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सत्‍तारूढ़ भाजपा को अपने प्रमुख मुस्लिम नेताओं के नाम भी बदल देने चाहिये। राजभर ने बातचीत में कहा था कि योगी सरकार ने फैजाबाद और इलाहाबाद जिलों के नाम यह कहते हुए बदल दिये कि उनका नामकरण मुगलों ने किया था। भाजपा में शाहनवाज हुसैन हैं, जो पार्टी के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता हैं। मुख्‍तार अब्‍बास नकवी केन्‍द्रीय मंत्री हैं और उत्‍तर प्रदेश में मोहसिन रजा मंत्री हैं। सबसे पहले इन सबके नाम बदले जाने चाहिये।
 
उन्‍होंने कहा कि ग्रांड ट्रंक रोड को मुस्लिम शासक शेरशाह सूरी ने बनवाया था, तो उसे भी उखाड़ दिया जाना चाहिये। भाजपा लोगों को उस पर चलने से क्‍यों नहीं रोकती। लाल किला और ताजमहल किसने बनवाया, क्‍या इन इमारतों को भी जमींदोज किया जाएगा। राजभर ने कहा था कि जिलों के नाम बदलने का कोई मतलब नहीं है। वह काम जो बसपा, सपा और कांग्रेस ने किया, वही काम भाजपा भी कर रही है।
 
इससे पहले एक टि्वट में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि सरकार शहरों का नाम बदल कर उसका श्रेय ले रही है । उन्होंने कहा था कि' राजा हर्षवर्धन ने अपने दान से प्रयाग कुंभ का नाम किया था और आज के शासक केवल प्रयागराज नाम बदलकर अपना काम दिखाना चाहते है, इन्होंने तो अर्ध कुंभ का नाम बदलकर भी कुंभ कर दिया है, यह परम्परा और आस्था के साथ खिलवाड. है ।
 
गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने इलाहाबाद जनपद का नाम प्रयागराज किए जाने को चुनौती देने वाली एक याचिका पर राज्य व केंद्र सरकार से जवाब मांगा है । अदालत ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई 19 नवम्बर को नियत की है। उक्त याचिका में याची ने जनपद के नाम परिवर्तन में राजस्व संहिता की धारा 6(2) का पालन न किए जाने का दावा किया है। याची का कहना है कि नाम परिवर्तन के लिए राज्य सरकार द्वारा आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और बिना आपत्तियां आमंत्रित किये ही जनपद का नाम बदल दिया गया।
 
वहीं याचिका का राज्य सरकार की ओर से विरोध करते हुए दलील दी गयी कि राजस्व संहिता की धारा 6(2) में किसी राजस्व क्षेत्र की सीमाओं के परिवर्तन पर आपत्तियां आमंत्रित करने का प्रावधान है न कि नाम परिवर्तन के मामले पर। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रतिवादियों राज्य सरकार व केंद्र सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस साल अगस्त माह में उप्र सरकार ने केंद्र को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें आगरा, बरेली और कानपुर के हवाई अडडों के नाम बदलने की बात कही गयी थी । हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने नाम बदलने की बात को सही बताते हुये कहा था कि वह इस स्थानों के पुराने ऐतिहासिक नामों को ही वापस ला रही है ।

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