सबरीमला पर लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए समग्र रवैया अपनाने की जरूरत

सबरीमला पर लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए समग्र रवैया अपनाने की जरूरत

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 14 2018 3:35PM
नयी दिल्ली। केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने बुधवार को सबरीमला मुद्दे पर ‘समग्र रवैया’ अपनाए जाने पर बल दिया ताकि लोगों की भावनाएं आहत नहीं हों। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर केंद्र मामले में ‘सही समय पर’ हस्तक्षेप कर सकता है। उच्चतम न्यायालय ने केरल स्थित सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के अपने फैसले की समीक्षा करने पर मंगलवार को सहमति जता दी थी, लेकिन अपने फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। इस फैसले के विरोध में केरल में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला है। यह पूछे जाने पर कि हालात से निपटने के लिये क्या अध्यादेश लाए जाने की आवश्यकता है तो शर्मा ने कहा कि केरल सरकार को मामले पर फैसला करना है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ‘सही समय पर’ केंद्र हस्तक्षेप कर सकता है।
 
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘सरकार को उसपर (अध्यादेश के बारे में) फैसला करना है और जरूरत पड़ने पर सही समय पर केंद्र सरकार निश्चित तौर पर हस्तक्षेप करेगी।’’यह पूछे जाने पर कि क्या मासिक धर्म से गुजरने वाली महिला के प्रवेश से मंदिर अशुद्ध हो जाएगा तो उन्होंने कहा, ‘‘मैं चिकित्सक हूं। मैं कोई भी टिप्पणी नहीं करूंगा क्योंकि मामला अदालत में विचाराधीन है, लेकिन हमें समग्र रवैया अपनाना होगा।’’ दो महीने चलने वाली मंडला मकराविल्लाकू तीर्थयात्रा का मौसम 17 नवंबर से शुरू हो रहा है। इस दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु सबरीमला मंदिर आते हैं। उच्चतम न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने गत 28 सितंबर को 4 :1 के बहुमत से सबरीमला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को हटा दिया था। न्यायालय ने इस प्रतिबंध को लैंगिक भेदभाव करार दिया था।

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