J&K में सरकार बनाने के प्रयास विफल, राज्यपाल शासन के बाद लगेगा राष्ट्रपति शासन

J&K में सरकार बनाने के प्रयास विफल, राज्यपाल शासन के बाद लगेगा राष्ट्रपति शासन

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 13 2018 10:38AM

जम्मू-कश्मीर में निकट भविष्य में लोकप्रिय सरकार का गठन होने की संभावना क्षीण है और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन की समाप्ति पर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकती है। जम्मू-कश्मीर के संविधान के तहत राज्यपाल शासन की अवधि आगे बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। तत्कालीन महबूबा मुफ्ती नीत गठबंधन सरकार से भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद राज्य में 19 जून से केंद्रीय शासन है।

छह महीने का राज्यपाल शासन 19 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। घटनाक्रम से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि कोई निर्वाचित सरकार नहीं बन पाने के कारण जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय शासन के विस्तार के लिए राष्ट्रपति शासन आवश्यक होगा। सूत्र ने कहा कि मौजूदा विधानसभा के तहत जम्मू-कश्मीर में निकट भविष्य में कोई लोकप्रिय सरकार बनने की संभावना क्षीण है। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने पिछले महीने कहा था कि वह राज्य में जल्दी चुनाव कराए जाने के पक्ष में हैं क्योंकि उन्हें नहीं लगता कि मौजूदा सदन से कोई लोकप्रिय सरकार बन सकती है।
 
87- सदस्यीय विधानसभा में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं है। पीडीपी के 28 विधायक हैं जबकि भाजपा के 25 और नेशनल कांफ्रेंस के 15 विधायक हैं। राज्यपाल की एक रिपोर्ट के बाद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट राष्ट्रपति से इसके लिए सिफारिश करता है तो राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है। ऐसी परिस्थितियों में केंद्र सरकार को केंद्रीय शासन 19 दिसंबर से आगे बढ़ाने के लिए संसद से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है।
 
राज्य के संविधान के अनुच्छेद 92 के तहत जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल का शासन लगाया गया है और राष्ट्रपति शासन संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत लागू किया जाता है। एक अन्य सूत्र ने कहा कि इसलिए व्यावहारिक रूप से जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय शासन के विस्तार के लिए केंद्र सरकार को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
 

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