भारत की भाषा हिन्दी, वैश्विक पटल पर हो रही है मजबूत

भारत की भाषा हिन्दी, वैश्विक पटल पर हो रही है मजबूत

अंकित सिंह | Jan 10 2019 9:48AM
हिन्दी, हिन्द और हिन्दुस्तान, ये तीनों एक देश, एक संस्कृति और एक हीं समाज के पूरक है। सीना गर्व से तब और भी चौड़ हो जाता है जब आपनी भावनाओं में बसने वाली भाषा वैश्विक स्तर पर भी लोगों को आकर्षित करने लगती है। यही कारण है कि जब भी कोई नेता, कोई कलाकार या कोई उद्योगपति विदेशों में जाकर हिन्दी में अपनी बात रखता है तो हम सब अपनी भाषा की बढ़ती महत्ता को देखकर भाव विभोर हो उठते हैं। हिन्ही अब सिर्फ भारत की भाषा नहीं रहीं। इसे बोलने और समझने वाले दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। 
 
 
आज 10 जनवरी है यानी कि विश्व हिन्दी दिवस। भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी। उसके बाद से लगातार विदेश मंत्रालय विदेशों में 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया शुरू कर दिया है। हांलाकि इससे पहले भी 10 जनवरी 1975 को नागपुर में विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन किया जा चुका था। इस सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इस शुरूआत का मकसद हिन्दी को विश्व पटल पर स्थापित करना था। विश्व में हिन्दी का विकास करने और एक अंतरराष्ट्रीय भाषा के तौर पर इसे प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिन्दी सम्मेलनों की शुरुआत की गई थी। विदेशों में भारत के दूतावास विश्व हिन्दी दिवस को विशेष रूप से मनाते हैं। सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिन्दी में व्याख्यान आयोजित किये जाते हैं। 1977 में विदेश मंत्री रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ में अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा दिया गया हिंदी में भाषण हिन्दी के कद को वैश्विक पटल पर पढ़ाने में काफी अहम भूमिका निभाई थी। 
 
 
आज चीनी भाषा के बाद सबसे ज्यादा हिन्दी बोली जाती है। हिन्दी बोलने वालों की संख्या करीब 54 करोड़ से ज्यादा है। भारत में यह सबसे ज्यादा बोली और समझी जाती है। भारत के अलावा हिन्दी गिरमिटियों देशों में खूब बोली जाती है। ये देश है फिजी, गुयाना, ट्रिनीडाड, टोबेगा, नेटाल, सूरीनाम मॉरिसश आदि। इनके अलावा पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, ब्रिटेन, अमेरिका, UAE में भी प्रचलित है। दुनिया के 130 विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है। साल में 10000 से ज्यादा किताबें हिन्दी छपती हैं। इसके अलावा 1500 से ज्यादा फिल्में हिन्दी में बनती है।
 
- अंकित सिंह

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