चीन प्रत्यर्पण विवाद पर प्रदर्शनकारियों ने किया संसद में हंगामा, पुलिस ने किया आंसू गैस का इस्तेमाल

चीन प्रत्यर्पण विवाद पर प्रदर्शनकारियों ने किया संसद में हंगामा, पुलिस ने किया आंसू गैस का इस्तेमाल

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 12 2019 3:41PM

हांगकांग। चीन में प्रत्यर्पण संबंधी विवादास्पद विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बुधवार को हांगकांग की संसद में हंगामा करने की कोशिश की जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई। हजारों लोगों ने सरकार के खिलाफ अपनी ताकत दिखाने के लिए अहम मार्गों को बाधित कर दिया। पुलिस ने काले कपड़े पहने प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए काली मिर्च के छिड़काव, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों में अधिकतर युवा और छात्र थे। 

प्रदर्शनकारियों ने चीन में प्रत्यर्पण को अनुमति देने वाले विवादास्पद विधेयक से पीछे हटने के लिए सरकार को अंतरराष्ट्रीय समयानुयार सुबह सात बजे तक का समय दिया गया था। इस समय-सीमा के बीतने के कुछ समय बाद ही झड़पें शुरू हो गईं। ‘लेजिस्लेटिव काउंसिल’ (लेगको) में विधेयक पर बहस से पहले शहर के बीच एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों की संख्या दंगा पुलिस की संख्या से बहुत ज्यादा थी। प्रदर्शनकारियों ने अहम मार्गों को बाधित कर दिया। इसके बाद लेगको में अधिकारियों ने बताया कि वे विधेयक के दूसरे पठन को ‘‘बाद की किसी तारीख’’ के लिए स्थगित करेंगे। समय सीमा समाप्त होते ही प्रदर्शनकारियों ने लेगको कार्यालयों की ओर बढ़ना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों को दंगा पुलिस पर धातु की छड़ें और अन्य चीजें फेंकते देखा गया।
पुलिस ने छातों का कवच की तरह इस्तेमाल कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पहले लाठीचार्ज किया, फिर उन पर काली मिर्च का छिड़काव किया और बाद में आंसू गैस का इस्तेमाल किया। शहर के मुख्य सचिव मैथ्यू चेउंग ने प्रदर्शनों के खिलाफ पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए बुधवार को प्रदर्शनकारियों से पीछे हटने की अपील की। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि मैं एकत्र हुए लोगों से अधिकतम संयम बरतने, शांतिपूर्ण रूप से तितर-बितर होने और कानून का उल्लंघन नहीं करने की अपील करता हूं। हांगकांग में 100 से अधिक कारोबारियों ने कहा कि वे प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए बुधवार को अपने प्रतिष्ठान नहीं खोलेंगे। शहर के बड़े छात्र संघों ने घोषणा की कि वे रैलियों में शामिल होने के लिए कक्षाओं का बहिष्कार करेंगे।

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