'द ताशकंद फाइल्स' मूवी रिव्यू- मुद्दा गंभीर लेकिन कमजोर डायरेक्शन

'द ताशकंद फाइल्स' मूवी रिव्यू- मुद्दा गंभीर लेकिन कमजोर डायरेक्शन

रेनू तिवारी | Apr 12 2019 2:33PM

 लोकसभा चुनाव का दौर है और ऐसे में भारत में जब भी किसी राजनेता की कहानी पर आधारित फिल्म बनती हैं तो विवाद जरूर खड़ा हो जाता हैं। विवेक अग्निहोत्री ने ऐसे ही ज्वलंत मुद्दे में हाथ डाला है। विवेक अग्निहोत्री ने चुनावी महौल में 'द ताशकंद फाइल्स' से रहस्यमय इतिहास के पन्ने पलटने की कोशिश की है। मुद्दा बड़ा हैं, विवाद भी हुआ है... लेकिन अब जानते हैं फिल्म कैसी हैं। 

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फिल्म 'द ताशकंद फाइल्स' की कहानी  

फिल्म भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मृत्यु का किस्सा दोबारा देश के सामने रखती है। फिल्म 'द ताशकंद फाइल्स' लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मृत्यु पर सवाल उठाए गए हैं कि क्या पूर्व पीएम की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई स्वाभाविक मृत्यु थी या ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद उन्हें जहर दे दिया गया था? बता दें कि उनकी मौत 11 जनवरी 1966 को हुई थी। उनकी मौत के बाद उनका पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया गया? उनके शरीर पर जगह-जगह कट्स के निशान क्यों थे? उनके पार्थिव शरीर को जब भारत लाया गया, तो वह सूजा और काला क्यों था? इन सवालों पर फिल्म बनाने की मंशा को लेकर निर्देशक विवेक अग्निहोत्री पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं, क्योंकि फिल्म क्लाइमैक्स में आकर जिन तथ्यों की और इशारा करती है, वे एकतरफा नजर आते हैं। फिल्म एक महत्त्वाकांक्षी पत्रकार रागिनी फुले के इर्द गिर्द घूमती है, जो एक खास न्यूज़ स्कूप के इंतज़ार में है। उसके हाथ कहीं से ताशकंद फाल्स लग जाती हैं, जिसमें लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मृत्यु का सच लिखा होता है।

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फिल्म 'द ताशकंद फाइल्स' रिव्यू

रागिनी फुले के इर्दगिर्द बनी इस फिल्म में रागिनी का किरदार श्वेता बसु ने निभाया है। श्वेता बसु अपनी एक्टिंग का लोहा 10 साल की उम्र में राष्ट्रीय पुरस्कार जीत का मनवा चुकी है। इस फिल्म से श्वेता बसु ने दमदार वापसी की है। इसे अलावा फिल्म में कई बड़े चेहरे है जैसे मिथुन चक्रवर्ती, नसीरुद्दीन शाह, पल्लवी जोशी, पंकज त्रिपाठी, मंदिरा बेदी, राजेश शर्मा हैं। सभी के उम्दा प्रदर्शन ने फिल्म में जान डाली है। मंदिरा बेदी ने भी काफी अच्छी एक्टिंग दिखाई है। मिथुन चक्रवर्ती और नसीरुद्दीन शाह इन सभी पर एक्टिंग में भारी हैं। जासूस के किरदार में विनय पाठक कहानी की अहम कड़ी बनते हैं। पंकज त्रिपाठी तो हैं ही सबसे अलग। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मृत्यु का मुद्दा काफी गंभीर है फिल्म के डायरेक्टर ने फिल्म को अच्छा बनाया हैं लेकिन कमियां भी छोड़ी हैं। कई जगहों पर डायरेक्टर क्या बताना चाहते है ये बिलकुछ समझ के परे हो जाता हैं। आधे से ज्यादा समय एक छोटे से सरकारी दफ्तर में शूट हुई यह फिल्म आपको अपने नाखून चबाने के लिए मजबूर करदेगी। 

मूवी रिव्यू- द ताशकंद फाइल्स

कलाकार- श्वेता बसु प्रसाद, मिथुन चक्रवर्ती,नसीरुद्दीन शाह, पल्लवी जोशी, राजेश शर्मा, पंकज त्रिपाठी, मंदिरा बेदी आदि।

निर्देशक- विवेक रंजन अग्निहोत्री

अवधि- 2 घंटा 24 मिनट

प्रभासाक्षी रेटिंग- 3*

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