कॉमेडी और ड्रामे का खूबसूरत सफर है इरफान खान की फिल्म कारवां

कॉमेडी और ड्रामे का खूबसूरत सफर है इरफान खान की फिल्म कारवां

रेनू तिवारी | Aug 3 2018 6:57PM

फिल्म का नाम- कारवां

डायरेक्टर- आकर्ष खुराना  
कलाकार- इरफान खान,मिथिला पालकर,कृति खरबंदा,आकाश खुराना 
मूवी टाइप- Comedy,Drama
अवधि- 2 घंटा
सर्टिफिकेट- U/A
रेटिंग- 3.5 स्टार
 
बॉलीवुड एक्टर इरफान खान की फिल्म कारवां बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हो गई है। इरफान की कैंसर जैसी जानलेवा बिमारी के पता चलने के बाद ये उनकी दूसरी फिल्म है। इससे पहले उनकी फिल्म 'ब्लैकमेल' इरफार खान के लंदन में इलाज कराने के दौरान रिलीज हुई थी। फिल्म का ट्रेलर जब रिलीज हुआ तो तब से लोग फिल्म के रिलीज होने का इंतजार कर रहै थे। फिल्म की स्टोरी को लोग देखना चाहते थे क्योंकि ये स्टोरी का एंगल काफी अलग था। फिल्म कारवां एक कॉमेडी ड्रामा है जिसमें की कहानी एक बेहद खास मैसेज भी देती है। फिल्म में कहा ये संदेश दिया गया है कि मंजिल से ज्यादा सफर मायने रखता है। 
 
फिल्म की कहानी
फिल्म में दो दोस्तों का बंगलूरू से कोच्चि तक का सफर दिखाया गया है। इनमें से एक है अविनाश, जिसका किरदार दलकर सलमान ने निभाया है और दूसरा है शौकत, जिसके किरदार में हैं इरफान खान. दोनों को रास्ते में मिलती है टीनएजर मिथिला। ये फिल्म तीन ऐसे लोगों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक-दूसरे से बिलकुल अलग हैं। मगर तीनों एक रोड ट्रिप पर साथ हैं। फिल्म में कृति खरबंदा और अमाला अकिनेनी भी सपोर्टिंग रोल में हैं। फिल्म की कहानी अविनाश (दुलकर सलमान ) को आई एक फ़ोन कॉल से शुरू होती है , जहां उसे बताया जाता है कि उसके पिताजी की डेथ हो गई है। और कोरियर कंपनी की तरफ से किसी और की डेड बॉडी अविनाश को दे दी जाती है। फिर वह अपने पिता की डेड बॉडी की तलाश में अपने दोस्त शौकत (इरफ़ान) के साथ निकल पड़ता है, फिर इस कारवां में तान्या (मिथिला पालकर) की एंट्री होती है, यात्रा कई जगहों से गुजरते हुए ट्विस्ट और टर्न्स के साथ आगे बढ़ती है, अब क्या अविनाश को सही बॉडी मिल पाती है, कहानी में आगे क्या होता है, और इस तरह पूरी यात्रा के दौरान अविनाश, तान्या और शौकत के रिश्तों का ताना-बाना बुना जाता है, ये सब कुछ जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

कमज़ोर कड़ियां 
फिल्म कारवां को डार्क कॉमिडी दिखाने के लिए कुछ ज्यादा मेहनत कर दी गई है। ऐसा लगता है कि फिल्म पर अलग और फनी दिखने का बोझ है। हालांकि यह काफी हद तक सफल भी होती है लेकिन इसमें दिखाई गई परिस्थितियां थोड़ी अकल्पनीय लगती हैं। 
 
बॉक्स ऑफिस 
फिल्म का बजट लगभग 20 करोड़ है और इसे लगभग 1000 स्क्रीन्स में रिलीज किया गया है। तीन फिल्मों के बीच अगर वर्ड ऑफ़ माउथ सही रहा तो फिल्म अच्छा कलेक्शन कर सकती है।
 
कुल मिलाकर कहानी एक ऐसी रोड ट्रिप से जुड़ी है, जिस पर कोई भी जाना नहीं चाहता था। फिल्म की कास्ट काफी शानदार है। बिना किसी तय फॉर्मूले पर काम किए फिल्म बांधे रखती है। ये जरूर कहा जा सकता है कि स्क्रिप्ट और मजबूत की जा सकती थी। कहानी एकदम नई है, लेकिन इसे सही तरीके से कहा नहीं गया है।
 

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