धन को दोगुना करना चाहते हैं? करोड़पति बनना चाहते हैं?

धन को दोगुना करना चाहते हैं? करोड़पति बनना चाहते हैं?

कमलेश पांडे | Jul 17 2018 3:43PM
समाज में रुपए-पैसे का महत्व दिनोंदिन बढ़ रहा है। इसलिए अधिकांश समर्थ व्यक्ति अपनी धनराशि को शीघ्रतापूर्वक दुगुना-चौगुना करने के फेर में लगे रहते हैं। दरअसल यह मौद्रिक युग है जिसमें अर्थ के बिना जीवन व्यर्थ है। लिहाजा मैं आपसे अपने रुपए-पैसे को दोगुना-चौगुना करने के लिए कुछेक पोंजी योजनाओं के बारे में नहीं बल्कि उन वास्तविक योजनाओं के बारे में बताऊंगा जो पिछले कुछ दशकों से कानूनी हैं और प्रचलन में भी। फिर भी आपको स्पष्ट कर दूं कि रुपए-पैसे को दोगुनी-चौगुनी करने का कोई निश्चित शॉर्टकट नहीं है, बल्कि इस हेतु लंबी अवधि के लिए धैर्य और पूंजी बाजार के समुचित ज्ञान की होती जरूरत है। इसलिए यहां पर मैं दीर्घकालिक धन दोगुनी करने की कुछेक योजनाओं के बारे में बताऊंगा।
 
#सबसे पहले जानिए अंगूठे नियम 72 क्या है? यह जानना किसी भी निवेशक के लिए जरूरी क्यों है?
 
सबसे पहले आपको 'अंगूठे नियम 72' के बारे में अवश्य जानना चाहिए। क्योंकि किसी भी निवेशक को नियम 72 या 72 के अंगूठे नियम से दो चीजों का सटीक आकलन मिलता है, जैसे- पहला, वापसी की दी हुई दर पर आपके रुपए-पैसे को दोगुना करने की सुनिश्चित अवधि और दूसरा, रिटर्न की वह दर जिस पर आपका रुपया-पैसा दिए गए समयावधि में दोगुना हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर, मान लीजिए कि आप नियम 72 के अनुसार 8 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज दर पर बैंक सावधि जमा में निवेश करना चाहते हैं, तो आपके द्वारा निवेशित धन को 72/8 = 9 वर्षों में दोगुना कर दिया जाएगा। इसका तात्पर्य है कि यदि आप नौ साल के लिए अपनी धनराशि निवेश करते हैं तो आपको दो लाख रुपए मिलेगा, जबकि आप बैंक की फिक्स्ड जमा योजना में एक लाख रुपए निवेश करेंगे। 
 
इसी प्रकार, यदि आप अपने रुपए-पैसे को दोगुना करना चाहते हैं तो 5 साल में आपको अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 72/5 = 14.40 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से रुपया-पैसा निवेश करना होगा। इसका आशय यह है कि यदि आपके पास एक लाख रुपए हैं तथा आपको 5 वर्षों में 2 लाख रुपए की जरूरत होगी तो आपको इसे कुछ चुनिंदे वित्तीय उत्पादों में ही निवेश करना होगा जो कि आपको अपना वित्तीय लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रति वर्ष 14.40 प्रतिशत की दर पर लाभ देते हुए रकम लौटा देता है। 
 
यहां पर मैं आपको स्पष्ट कर दूं कि नियम 72 आपको सिर्फ अनुमानित अनुमान देता है, लेकिन उस समय यह बेहद आसान हो जाता है जब आपकी पहुंच कैलकुलेटर तक नहीं है या फिर कंपाउंडिंग या छूट के बारे में एबीसीडी कुछ भी नहीं पता है। इसलिए इस नियम को हमेशा याद रखिए, इससे आपको वित्तीय फैसले लेने में सहूलियत होगी।
 
#अब जानिए कुछेक सर्वश्रेष्ठ मनी दोगुनी करने वाली योजनाओं के बारे में, जो निम्नलिखित हैं:-
 
पहला, कर मुक्त बांड भले ही हरेक साल जारी नहीं होते हैं, लेकिन जब भी जारी होते हैं तो प्रायः निवेशक निहाल हो जाते हैं। पिछला टैक्स-फ्री बॉन्ड 2015 में जारी हुआ था। तब सरकार ने टैक्स-फ्री बॉन्ड राशि 40,000 करोड़ रुपये जारी करने के लिए सात राज्य चलाने वाली संस्थाओं को अनुमति दी थी। आम तौर पर हमने पीएफसी और एनटीपीसी द्वारा जारी कर मुक्त बांड की उच्च स्तरीय मांग देखी है, जबकि पाइपलाइन में भी बहुत कुछ रहता है। याद दिला दें कि 2015 श्रृंखला के लिए टैक्स-फ्री बॉन्ड द्वारा प्रस्तावित कूपन दर कार्यकाल के आधार पर प्रति वर्ष 8.20 प्रतिशत से 8.50 प्रतिशत प्रति वर्ष (कर समायोजित रिटर्न सहित) थी। इसलिए यदि आप भविष्य में निकलने वाले ऐसे किसी भी टैक्स-फ्री बॉन्ड में से किसी एक में भी निवेश करते हैं तो आप अपने रुपए-पैसे को लगभग 8-9 साल में ही दोगुना कर सकते हैं। 
 
दूसरा, कॉर्पोरेट जमा और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनएसडी) को भी बेहतर निवेश विकल्प समझा जाता है। ऐसा इसलिए कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा दरों में कटौती के समसामयिक परिदृश्य के परिप्रेक्ष्य में कई निवेशक बेहतर निवेश के रास्ते की तलाश में हैं, जिनकी जोखिम क्षमता कॉर्पोरेट जमा में बड़ी निवेश जैसी है। चूंकि कॉर्पोरेट और एनबीएफसी, अन्य बैंकों की तरह आरबीआई समर्थन का आनंद नहीं लेते हैं, इसलिए किसी भी बैंक द्वारा सावधि जमा की तुलना में उनके द्वारा दी गई ब्याज दरें काफी अधिक होती हैं। गौरतलब है कि एनबीएफसी सहित विभिन्न कंपनियों द्वारा एनसीडी जारी किए जाते हैं, जबकि कॉर्पोरेट जमा केवल कंपनियों द्वारा ही जारी की जाती है। एनसीडी व कॉर्पोरेट जमा कार्यकाल या फिर उनके क्रिसिल या आईसीआरए रेटिंग के आधार पर सालाना लगभग 9-10 प्रतिशत की वापसी की दर देते हैं। लिहाजा, इनमें निवेश करने से आपका रुपया-पैसा लगभग आठ साल में ही दोगुना हो जाएगा। 
 
तीसरा, राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र जो भारत के डाक विभाग द्वारा जारी किए जाते हैं। इसे सबसे सुरक्षित निवेश मार्ग भी करार दिया जाता है। ऐसा इसलिए कि एनएससी एक निश्चित ब्याज दर पर सुनिश्चित कार्यकाल के लिए ही आते हैं, जैसे कि 5 या 10 साल के लिए। खास बात यह कि इसकी परिपक्वता राशि पर कोई टीडीएस कटौती नहीं की जाती है। इसके अलावा, बैंकों से ऋण प्राप्त करने के लिए एनएससी को संपार्श्विक सुरक्षा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। आम तौर पर 5 साल एनएससी द्वारा प्रस्तावित ब्याज दरें 8.50 प्रतिशत प्रति वर्ष है, जबकि 10 साल एनएससी के लिए 8.80 प्रतिशत प्रति वर्ष है। इसमें वर्षवार कमी-वेशी होती रहती है।
 
चौथा, किसान विकास पत्र (केवीपी), जिसे वर्ष 2012 में समाप्त कर दिया गया था लेकिन वित्त वर्ष 2015 से इसे फिर से पेश किया गया है। बता दें कि केवीपी को बंद करने के लिए आय के स्रोत पर कर कटौती का तर्क दिया गया, जो कि उसको बंद करने का मौलिक कारण था। दरअसल, लोग नकद (काला धन) में केवीपी खरीदते थे और परिपक्वता के बाद उनका काला धन, सफेद धन में बदल जाता था। ऐसा इसलिए कि तब पैन की भी कोई आवश्यकता नहीं होती थी क्योंकि नकदी वाले किसी भी व्यक्ति को पोस्ट ऑफिस से केवीपी दे दिया जाता था, सिर्फ उसके द्वारा मांगे जाने पर। इस तरह केवीपी का मुख्य रूप से काले धन को सफेद में बदलने के लिए उपयोग किया जाता था। यही वजह है कि केवीपी को पुन: पेश करते समय इस छेड़छाड़ को समाप्त कर दिया गया है। अब 50,000 रुपये या उससे अधिक की नकदी में केवीपी खरीदने वाले प्रत्येक निवेशक को अनिवार्य रूप से अपना पैन नंबर प्रस्तुत करना होगा। वर्तमान में केवीपी 8.70 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज दर की पेशकश कर रहा है जिसके परिणामस्वरूप 100 महीने यानी 8 साल और 4 महीने में आपका धन दोगुना हो जाता है।
 
पांचवां, लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) एक आकर्षक निवेश योजना है। कर्मचारी भविष्य निधि योजना के बाद यह सरकार की दूसरी सबसे लोकप्रिय योजना है। वास्तव में, पीपीएफ कमाई करने वाले प्रत्येक वर्ग यानी स्व-नियोजित, वेतनभोगी या सरकारी कर्मचारी को प्रति वर्ष 500 रूपए कम से कम बचाने और निवेश करने के लिए सक्षम बनाता है। यह सबसे सुरक्षित और सर्वाधिक भरोसेमंद योजना है जिसमें न्यूनतम 500 रुपए का योगदान किया जा सकता है। इसकी लॉक-इन अवधि 15 साल की है। इसकी रिटर्न दर प्रत्येक वर्ष सरकार द्वारा तय की जाती है जो उस वित्तीय वर्ष के लिए प्रभावी रहती है। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए, वापसी की लागू दर 8.75 प्रतिशत प्रति वर्ष है जो 8 साल 3 महीने में ही दोगुना हो जाती है। चूंकि पीपीएफ की लॉक-इन अवधि 15 वर्ष है, इसलिए परिपक्वता के समय आपका पैसा कई गुना हो जाता है।
 
छठा, बैंक सावधि जमा का प्रचलन काफी पुराना और प्रचलन में है। इसके निवेशकों को कोई फर्क नहीं पड़ता कि बाजार कहां जाता है या आरबीआई की कटौती दर कितनी है। ब्याज दर के तमाम उतार चढ़ाव के बावजूद बैंक सावधि जमा हमेशा से ही हर भारतीय निवेशक की पहली पसंद बनी हुई है। इस सावधि जमा में निवेश के कई पक्ष और पेशेवर हैं। जैसे कि आरबीआई द्वारा 1 लाख रुपये तक सावधि जमा बीमाकृत है, जबकि कर के बाद रिटर्न मुद्रास्फीति को हरा नहीं सकता है। लेकिन अभी भी अल्पकालिक अवधि के लिए बैंक सावधि जमा अन्य निवेश विकल्पों पर प्राथमिकता दी जाती है। आरबीआई द्वारा 50 बीपीएस (0.50 फीसदी) की हालिया दर में कटौती के बाद, लगभग सभी बैंकों ने एफडी पर ब्याज दर 0.25 फीसदी या 0.50 फीसदी प्रति वर्ष घटा दी है। वर्तमान में एफडी ब्याज दरें 8 फीसदी  से 9 फीसदी के बीच प्रति वर्ष बदलती रहती हैं। इसलिए आपके रुपए-पैसे को दोगुना करने में बैंक सावधि जमा में लगभग 8-9 साल लगेंगे।
 
सातवां, म्यूचुअल फंड्स भी एक आकर्षक निवेश योजना है। इसमें वैसे निवेशक जो थोड़ा सा भी जोखिम लेने के इच्छुक हैं, बेहतर रिटर्न अर्जित कर सकते हैं। विभिन्न प्रकार के म्यूचुअल फंड, इक्विटी उन्मुख, ऋण उन्मुख, ईएलएसएस, संतुलित या हाइब्रिड म्यूचुअल फंड इत्यादि हैं। प्रत्येक प्रकार के फंड के अपने पेशेवर व विपक्ष होते हैं जो प्रत्येक निवेशक के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है, जैसे- यदि आप अपने बच्चे की शिक्षा के लिए निवेश कर रहे हैं तो आपके पास इक्विटी उन्मुख फंडों के साथ 15-18 साल का पर्याप्त समय हो सकता है। लेकिन जब आप अल्पकालिक वित्तीय लक्ष्य की खोज में हैं तो अपने सपनों के घर के नीचे भुगतान के लिए धन जमा करना और ऋण उन्मुख फंड के साथ जाना उचित रहेगा। इसी तरह यदि आप एक नए निवेशक हैं और अपनी उंगलियों को शेयर बाजार में डुबोना चाहते हैं तो संतुलित धन से शुरू करना बुद्धिमानी होगी, क्योंकि इससे आपको ऋण और इक्विटी उपकरणों दोनों का अनुभव मिलेगा। म्यूचुअल फंड की रिटर्न फंड से फंड और आपके द्वारा निवेश किए जाने वाले कार्यकाल से भिन्न होती है। लेकिन यदि हम सामान्य धारणा से जाते हैं तो दीर्घकालिक म्यूचुअल फंड में 12 से 15 फीसदी प्रति वर्ष की वापसी होती है। अत: आप म्यूचुअल फंड मार्ग चुनकर अपना रुपया-पैसा लगभग 5-6 वर्ष में ही दोगुना कर सकते हैं।
 
इसके अलावा, शेयर बाजार, गोल्ड/गोल्ड ईटीएफ और रियल एस्टेट में भी निवेश करके अपने धन को बढ़ा सकते हैं।
 
-कमलेश पांडे

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