विशेषज्ञ राय

जानिए क्या है इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक? कैसे उठा सकते हैं इससे फायदा?

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 31 2018 1:48PM

केंद्र सरकार बैंक सुविधा पाने से वंचित लोगों के लिए 'इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक' यानी कि आईपीपीबी की सुविधा लेकर आगामी एक सितंबर से हर जरूरतमंद व्यक्ति के दरवाजे पर दस्तक देने वाली है। इसलिए हो जाइए तैयार, क्योंकि सरकार आईपीपीबी के माध्यम से आपके दरवाजे पर बैंकिंग सुविधा देने में डाकघरों की पहुंच और विश्वास का लाभ उठाएगी। उसे भरोसा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आईपीपीबी लांच किए जाने से देश में बैंकिंग क्षेत्र की पहुंच और प्रभाव में महत्वपूर्ण मजबूती आएगी।

बता दें कि आगामी 01 सितंबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश भर में आईपीपीबी लांच किए जाने की विधिवत घोषणा की गई है, जिससे विश्वसनीय डाक सेवक अब बैंक सुविधाओं से वंचित लाखों लोगों और वित्तीय सेवाओं से अभी तक दूर रहे लोगों के लिए एक बैंकर बन जाएगा। इससे बूढ़े, आने-जाने में असहाय लोगों के साथ-साथ महिलाओं को भी काफी सुविधा होगी और सहूलियत मिलेगी। बता दें कि आईपीपीबी लांच किए जाने से देश में बैंक शाखाओं की संख्या लगभग दोगुनी हो जाएगी। वर्तमान में बैंक शाखाओं की संख्या 1.40 लाख है जो आगामी एक सितंबर से बढ़कर 2.90 लाख से अधिक हो जाएगी। मौजूदा समय में देश में ग्रामीण शाखाओं की संख्या लगभग 49,000 है जो आगामी एक सितंबर से बढ़कर 1.75 लाख से भी अधिक हो जाएगी।

स्पष्ट है कि आईपीपीबी का विजन सरकार के वित्तीय समावेश एजेंडा का विस्तार करने के साथ-साथ आम जन के लिए सर्वाधिक पहुंच योग्य, किफायती और विश्वसनीय बैंक बनाना है, जिसके मद्देनजर डाक विभाग के विशाल नेटवर्क का लाभ लिया जाएगा। आपको पता होना चाहिए कि लगभग 300,000 डाक सेवकों तथा ग्रामीण डाक सेवकों के साथ डाक विभाग देश के प्रत्येक कोने को कवर करता है। यही वजह है कि इसके सहयोग से आईपीपीबी को बैंकिंग सेवाओं में अंतिम स्थान की खाई को पाटने में मदद मिलेगी।

सरकार की योजना है कि इसे लांच किए जाने के दिन ही आईपीपीबी के देश भर में 650 शाखाएं और 3050 एक्सिस प्वाईंट्स होंगे, जो बैंक बचत और चालू खाता, मुद्रा स्थानांतरण, प्रत्यक्ष लाभ स्थानांतरण, बिल तथा यूटिलिटी भुगतान और उद्यम और मर्चेट भुगतान जैसी अनेक सुविधाएं देंगे। ये बैंक के अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए उक्त तमाम सुविधाएं और उससे संबंधित सेवाएं विभिन्न चैनलों, यथा- काउंटर सेवा, माइक्रो-एटीएम, मोबाइल बैंकिंग एप, एसएमएस तथा आईबीआर आदि के माध्यम से दी जाएगी। अद्यतन योजना के मुताबिक, देश में 31 दिसंबर, 2018 तक सभी 1.55 लाख डाक घरों को आईपीपीबी प्रणाली से जोड़ दिया जाएगा।

कहना न होगा कि आईपीपीबी ने डाक विभाग के साथ एक मजबूत एकीकृत मॉडल बनाया है जिसके तहत डाक घर बचत बैंक (पीओएसबी) खाताधारक अपने विभिन्न खातों को जोड़कर आईपीपीबी द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। स्वाभाविक है कि आईपीपीबी खाता के मार्फ़त डाक विभाग के उपभोक्ताओं को वैसी अनेक बैंकिंग सेवाएं प्रदान करेगा, जिसका अनुभव खाताधारकों ने पहले नहीं किया होगा।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि आईपीपीबी लांच करना सरकार द्वारा देश के दूर-दराज क्षेत्रों तक तेजी से विकास कर रहे भारत के लाभों को पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। इससे ई-कॉमर्स कम्पनियों को भी नए ग्राहक मिलेंगे। साथ ही, यह भी सुनिश्चित होगा कि डिजिटल भारत जैसे सरकार के अग्रणी कार्यक्रमों का लाभ विकास की कतार में खड़े अंतिम नागरिक तक पहुंचाया जा सके और वित्तीय समावेश का हमारा सपना सबके लिए साकार हो सकें।

यही वजह है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय डाक भुगतान बैंक की स्‍थापना के लिए संशोधित लागत अनुमान को भी तमाम किन्तु-परन्तु के बावजूद अपनी मंजूरी दे दी है। दरअसल, आईपीपीबी की स्थापना के लिए परियोजना खर्च पहले 800 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था, जो अब बढ़कर 1,435 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। हालांकि इसकी महत्ता और उपयोगिता के मद्देनजर ही मन्त्रिमण्डल ने इससे सम्बंधित संशोधन को मंजूरी दे दी है। बता दें कि संशोधित लागत अनुमानों में 635 करोड़ रुपये की अतिरिक्‍त धनराशि में से चार सौ करोड़ रुपये प्रौद्योगिकी खर्च के लिए और 235 करोड़ रुपये मानव संसाधन पर खर्च के लिए होंगे।

फिलवक्त आईपीपीबी सेवाएं 1 सितम्‍बर, 2018 से 650 आईपीपीबी शाखाओं और 3250 अभिगम इकाइयों और दिसम्‍बर 2018 तक सभी 1.55 लाख डाकघरों (अधिगम इकाइयों) में उपलब्‍ध होंगी। इस परियोजना से करीब 3500 कुशल बैंकिंग पेशवरों और देशभर में वित्‍तीय साक्षरता का प्रसार करने के कार्य में लगे अन्‍य लोगों के लिए रोजगार के नये अवसर सृजित करेगी। इस परियोजना का उद्देश्‍य आम आदमी के लिए आसानी से पहुंचने, वहन करने योग्य और विश्वसनीय बैंक का निर्माण करना है।

इसके अलावा, जहां बैंक नहीं है वहां इस बाधा को समाप्त करके वित्तीय समावेशन की दिशा में आगे बढ़ना और दरवाजे तक बैंकिंग सहायता के जरिए कम बैंकों वाली आबादी के वैकल्पिक खर्च को कम करना है। सच कहा जाए तो सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना उसकी ‘कम नगदी’ वाली अर्थव्यवस्था की परिकल्पना को पूरा करेगी और आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा देगी। खास बात यह कि आईपीपीबी की जबरदस्त आईटी रूपरेखा बैंक ग्रेड प्रदर्शन, धोखाधड़ी और जोखिम कम करने के मानकों के साथ-साथ भुगतान और बैंकिंग क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ परम्पराओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।

बहरहाल, आईपीपीबी अपने प्रौद्योगिकी सक्षम समाधानों के जरिए भुगतान, वित्तीय सेवाएं प्रदान करेंगी जिन्हें डाक विभाग द्वारा कर्मचारियों, अंतिम मील के एजेंटों तक पहुंचाया जा सकेगा, ताकि वे डाकिए के स्थान पर वित्तीय सेवाओं के अग्रदूत बन सकें। यही नहीं, आईपीपीबी अपने अंतिम मील एजेंट यानी कि डाक कर्मचारी और ग्रामीण डाक सेवकों को आईपीपीबी सेवाएं प्रदान करने के लिए सीधे उनके खाते में प्रोत्साहन, कमीशन का भुगतान करेंगी, ताकि वे ग्राहकों को आईपीपीबी डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित कर सकें। विशेष बात यह है कि डाक घरों के साधनों को बढ़ाने के लिए आईपीपीबी द्वारा भुगतान किए गए कमीशन के एक हिस्से का डाक विभाग द्वारा इस्तेमाल किया जाएगा। स्वाभाविक है कि इससे वहां मिलने वाली न्यूनतम जनसुविधाओं में भी अपेक्षित बढ़ोत्तरी होगी।

-कमलेश पांडे

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