आयकर रिटर्न 31 अगस्त से पहले जरूर कर दें दाखिल नहीं तो होगी बड़ी मुश्किल

आयकर रिटर्न 31 अगस्त से पहले जरूर कर दें दाखिल नहीं तो होगी बड़ी मुश्किल

कमलेश पांडे | Aug 22 2018 4:04PM
यदि आपको नहीं पता तो यह जान लीजिए कि वित्त वर्ष 2017-18 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की नई अंतिम तिथि 31 अगस्त है। इसलिए अगर आप किसी कारण वश रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए हैं वो अंतिम तिथि का इंतजार मत कीजिए और शीघ्र ही अपना रिटर्न दाखिल कर दीजिए। गौरतलब है कि आयकर विभाग दो बार इस तिथि को बढ़ा चुका है और अब आगे नहीं बढ़ाने वाला। नियमतः, प्रत्येक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिथि 31 मार्च तक आयकर रिटर्न दाखिल करना होता है। लेकिन किसी कारणवश छूट गए लोगों की सुविधा के लिए सरकार 31 जुलाई तक मौका देती है, जिसे इस बार बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है। इसलिए इस सुनहरे मौके को न गंवाएं अन्यथा एक से पांच हजार रुपए तक की न्यूनतम पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है।
 
अबकी खास बात यह कि आयकर दाताओं को अब आयकर रिफंड मात्र एक पखवारे यानी कि 15 दिनों के भीतर ही मिल जाया करेगा, क्योंकि आयकर विभाग ने इसके लिए अपनी कमर कस ली है। नई योजना के मुताबिक, किसी भी सूरत में आयकर रिफंड का पेमेंट टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद एक पखवारा यानी कि 15 दिनों के भीतर ही कर दिया जाएगा। बता दें कि पहले आयकर रिफंड पेमेंट में औसतन दो से तीन माह का समय अमूमन लग जाया करता था। लेकिन अब बदलते आर्थिक परिदृश्य में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी कि सीबीडीटी ने आयकर विभाग से आयकर रिफंड की प्रक्रिया अविलम्ब तेज करने का निर्देश दिया है।
 
आयकर विभाग, नई दिल्ली के एक उच्चाधिकारी की मानें तो जिनका आयकर रिटर्न दाखिल हो गया है एवं ई-वेरिफिकेशन भी हो गया है तो ऐसे लोगों का रिफंड आमतौर पर दस से बारह दिन में आ गया है। क्योंकि इस बारे में आयकर विभाग अब बहुत तेजी से काम कर रहा है। इसके विपरीत, जिनका रिफंड बनता तो है लेकिन किसी कारण वश उनका ई-वेरिफिकेशन समय पर नहीं हुआ है तो उसमें रिफंड आने में कुछ विलम्ब सम्भव है। ऐसी स्थिति में आयकर दाताओं के लिए बेहतर होगा कि वे आयकर रिटर्न दाखिल करने के साथ ही ई-वेरिफिकेशन भी जल्द से जल्द करा दें, ताकि विभाग को उनका रिफंड भेजने में सहूलियत हो।
 
बता दें कि यदि किसी कारणवश आपका ज्यादा टैक्स कट गया है तो आप अविलम्ब आयकर रिटर्न फाइल कर अपने रिफंड का दावा कर सकते हैं। लेकिन यदि आप आयकर रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो फिर आप किसी भी सूरत में अपने रिफंड का क्लेम नहीं कर पाएंगे। इसलिए यदि आपने अब तक आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है तो अब भी आपके पास एक सुनहरा मौका है, क्योंकि 31 अगस्त के बाद पेनल्टी जमा किए बिना आप आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएंगे, जो किसी के ऊपर एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ की तरह होगा।
 
# आयकर रिटर्न फाइलिंग की ई-वर्जन में विभागीय मनमाफिक बदलाव से करदाता परेशान
 
हाल-फिलहाल आयकर रिटर्न फाइल करने की कोशिश करने वाले वेतनभोगी करदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक वर्जन में कुछ और बदलाव देखने को मिले हैं। जबकि आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि में अब लगभग डेढ़ सप्ताह का समय ही बचा है। लिहाजा, बार-बार हो रहे बदलावों से कुछ दिक्कतें भी पैदा हो रही हैं। क्योंकि इन बदलावों के चलते दोबारा डेटा एंटर करना होता है जिससे आखिरी समय में अतिरिक्त जानकारियां जुटानी पड़ती हैं। कई मामलों में करदाताओं को अपने चार्टेड अकाउंटेंट्स से नया स्पष्टीकरण भी मांगना पड़ता है।
 
दरअसल, वेतनभोगी करदाताओं के लिए आईटीआर की आखिरी तारीख 31 जुलाई थी, जिसे अब 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया गया है। साथ ही, वेतनभोगी वर्ग द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म आईटीआर-एक और आईटीआर-दो के इलेक्ट्रॉनिक वर्जन को क्रमश: विगत 1 अगस्त और 9 अगस्त को बदल दिया गया। बहरहाल, ताजा बदलावों में 'अन्य स्रोतों से आमदनी' के तहत करयोग्य आय के संबंध में अतिरिक्त जानकारियां मांगी जा रही हैं। करदाता को बैंक सेविंग अकाउंट्स से ब्याज, सावधि जमा, आयकर रिफंड पर ब्याज और दूसरे ब्याज को अलग-अलग दिखाने को कहा जा रहा है।
 
इसके अलावा, कॉर्पोरेट एंटिटीज के इस्तेमाल वाले आईटीआर-सात सहित सभी आईटीआर फॉर्म में कई बदलाव किए जा चुके हैं। सच कहा जाए तो गत 5 अप्रैल को जारी नोटिफिकेशन के बाद कुछ मामलों में अब तक 4 बार बदलाव हो चुके हैं। दिलचस्प बात तो यह है कि आई-टी डिपार्टमेंट चुपके से बदलाव कर देता है। आलम यह है कि नोटिफाइड फॉर्म को नहीं बदला जाता है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक वर्जन को बदल दिया जाता है। चूंकि अधिकतर मामलों में ई-फाइलिंग अनिवार्य है, अतः करदाताओं और उनके प्रोफेशनल्स को आखिरी क्षणों में बदलाव करना पड़ता है।'
 
बता दें कि वेतन पर काम करने वालों के साथ-साथ अपना स्वरोजगार करने वालों के लिए भी आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि अब 31 अगस्त है। इसलिए ऑनलाइन आईटीआर फाइल करते समय सही आईटीआर फॉर्म चुनना बहुत जरूरी है। क्योंकि सभी ऑनलाइन आईटीआर सिर्फ आयकर की ऑफिशियल ई-फाइलिंग वेबसाइट https://incometaxindiaefiling.gov.in/ पर ही फाइल किए जाते हैं। इसलिए अगर यह आपकी पहली फाइलिंग नहीं है तो चौथे चरण में चले जाइए।
 
और अगर आप पहली बार ऑनलाइन अपना टैक्स रिटर्न फाइल कर रहे हैं तो आपको एक यूजर आईडी बनानी पड़ेगी। नई प्रोफाइल बनाने के लिए दाईं तरफ मौजूद 'नया रजिस्ट्रेशन टैब' का इस्तेमाल करें और वहां अपना अद्यतन विवरण भरें। जिसके बाद आपकी दर्ज की गई ईमेल आईडी या मोबाइल फोन पर एक ओटीपी आएगा। सच कहा जाए तो यह ठीक नहीं है कि ऐसे बदलाव के बाद रिटर्न फाइल करने वालों से आप अतिरिक्त जानकारी मांग रहे हैं, जबकि पहले आईटीआर फाइल करने वालों से आपने यह जानकारियां नहीं मांगी थीं।
 
बताया जाता है कि करदाताओं को बैंक खातों से मिले ब्याज की जानकारी आसानी से मिल जाती है, लेकिन बहुत से लोग आयकर रिफंड पर ब्याज की जानकारी नहीं दे रहे थे। पहले भले ही इसे नजरअंदाज कर दिया जाता था, लेकिन अब आईटी रिफंड पर ब्याज करयोग्य है। यही वजह है कि बहुत से करदातागण अब अपने-अपने प्रोफेशनल्स से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।' दूसरी ओर, बहुत से करदातागण थर्ड पार्टी रिटर्न फाइलिंग सॉफ्टवेयर के जरिए रिटर्न जेनरेट करते हैं, जिससे आयकर विभाग की ओर से जारी वर्जन में कोई बदलाव होने पर थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर में भी बदलाव करना पड़ता है, जिसमें कुछ दिन समय लग सकता है।'
 
#यदि बड़ी टैक्स चोरी करेंगे तो सीबीडीटी करवाएगी जांच
 
आयकर विभाग की मानें तो उसने जांच के लिए अधिक टैक्स चोरी वाले मामलों को ही चुना है, जिसके तहत पिछले असेसमेंट ईयर (2017-18) में दाखिल की गई लगभग 6.86 करोड़ आयकर रिटर्न में से करीब 0.35 पर्सेंट की जांच की जाएगी। उसके अलावा, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज को भी अपने करदाताओं पर विश्वास है, लेकिन कर चोरी करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। इसलिए उसने कर आधार भी बढ़ा दिया है। समझा जाता है कि ऑनलाइन फाइलिंग के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं देने पड़ते, इसलिए डिडक्शंस या इग्जेम्पशंस में दाएं-बाएं करना कुछ समय के लिए आसान दिखाई देता है।
 
हालांकि, इससे बचने के लिए कोई हाउस रेंट अलाउंस, मेडिकल इंश्योरेंस, होम लोन, एजुकेशन लोन या डिसेबिलिटी के लिए डिडक्शन बिना किसी सबूत के क्लेम कर सकता है। यह बात दीगर है कि इस मद में चोरी पकड़े जाने पर फर्जी डिडक्शंस और इग्जेम्पशंस की भारी कीमत चुकानी पड़ती है। यदि करदाता ने जानबूझकर गलत डिडक्शन या इग्जेंप्शन क्लेम किया है और उसके पास कोई यथोचित सबूत नहीं हैं तो इसे टैक्स की चोरी माना जाएगा। फलतः सेक्शन 270 ए के अनुसार, ऐसे मामलों में टैक्स चोरी की रकम के 200 प्रतिशत तक की पेनल्टी लगाई जा सकती है। अब टैक्स डिपार्टमेंट की डेटा ऐनालिटिक्स की क्षमता में भी लगातार सुधार हो रहा है जिससे गड़बड़ी करने वालों के पकड़े जाने के अवसर भी बढ़ गए हैं।
 
# यदि आपकी रिटर्न अस्वीकार होती है तो लग सकता है जुर्माना
 
अमूमन प्रदत्त आय विवरणी में मिसमैच होने पर रिटर्न को अस्वीकार कर दिया जाता है और असेसी को अपनी त्रुटियां सुधारने का एक मौका दिया जाता है। लेकिन यदि आप जानबूझ कर गलत जानकारी देंगे तो इसके गंभीर परिणाम हो भी सकते हैं। जानकार बताते हैं कि अगर असेसिंग अधिकारी को आय विवरणी में गड़बड़ी मिलती है तो वह जुर्माना भी लगा सकता है जिससे करदाता के खिलाफ मामला भी शुरू हो जाता है। लिहाजा, आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इस विषय में अपेक्षित सही जानकारी दिया जाना जरूरी है।
 
-कमलेश पांडे

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