धोनी के ग्लव्स पर विवाद क्यों? क्या बलिदान बैज का मतलब भी जानते हैं ?

धोनी के ग्लव्स पर विवाद क्यों? क्या बलिदान बैज का मतलब भी जानते हैं ?

अनुराग गुप्ता | Jun 7 2019 1:58PM

विश्व कप 2019 में खेले गए भारत के पहले मुकाबले के बाद से विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी के ग्लव्स को लेकर विवाद शुरू हो गया। दरअसल महेंद्र सिंह धोनी ने मैच के दौरान बलिदान बैज वाला ग्लव्स पहना हुआ था ऐसा सोशल मीडिया और खबरों के जरिए दावा किया जा रहा है। लेकिन क्या यह सही है? 

बलिदान बैज

भारतीय सेना की एक खास टुकड़ी को यह बैज मिलता है जो आतंकियों से लड़ने और उन्हीं के इलाके में घुसकर मारने की क्षमता रखते हैं। बेहद कड़ी ट्रेनिंग और पैराशूट से कूदकर दुश्मन के इलाके को तबाह करने में महारत हासिल करने वाले सैनिकों को पैरा कमांडो कहते हैं और इस तरह का बलिदान बैज स्पेशल पैरा फोर्सेज के जवानों को दिया जाता है।

पूरा मामला

धोनी ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए विश्व कप के पहले मुकाबले में बलिदान बैज की निशानी वाले ग्लव्स पहने हुए थे जिसके बाद क्रिकेटप्रेमियों ने सोशल मीडिया में तस्वीर को पोस्ट किया और महेंद्र सिंह धोनी की जमकर तारीफ की। कुछ ने लिखा कि एक बार फिर सेना को सम्मान देते हुए महेंद्र सिंह धोनी। यह बेहद अद्भुत नजारा है। जबकि दूसरे ने लिखा कि सेना के शौर्य को महान क्रिकेटर ने दिया सम्मान। 

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सोशल मीडिया में वायरल हो रहे धोनी के ग्लव्स को लेकर आईसीसी ने आपत्ति जताई और कहा कि सेना के प्रतीक चिह्न के इस्तेमाल वाला ग्लव्स खेल नियम के खिलाफ है और इसी के साथ आईसीसी ने बीसीसीआई को इसे हटाने का अनुरोध किया। आईसीसी की महाप्रबंधक क्लेयर फर्लोंग ने कहा कि शीर्ष संस्था ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड से इस चिन्ह को हटाने का आग्रह किया है। भारत को रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगला मैच खेलना है। फर्लोंग ने कहा कि यह नियमों के खिलाफ है और हमने इसे हटाने का आग्रह किया है।

ग्लव्स को लेकर जारी विवाद पर बीसीसीआई ने आईसीसी को पत्र लिखकर महेंद्र सिंह धोनी का पक्ष लिया और लिखा कि धोनी को 'बलिदान बैज' हटाने की जरूरत नहीं। आईसीसी के नियमों के अनुसार खिलाड़ी कोई व्यावसायिक, धार्मिक या सेना का लोगो नहीं लगा सकता है। हम सभी जानते हैं कि इस मामले में व्यावसायिक या धार्मिक जैसा कोई मामला नहीं है।  इतना ही नहीं यह तो अर्द्धसैनिक बलों का भी चिन्ह नहीं है और इसलिए धोनी ने आईसीसी के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है। इसी के साथ खेल मंत्रालय ने भी धोनी का साथ दिया और बीसीसीआई से इससे जुड़ी हुई जानकारी मांगी है।

भारतीय सेना का पक्ष

यह विवाद इतना बढ़ गया कि भारतीय सेना को भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करानी पड़ी। सेना ने बचाव करते हुए कहा कि इस विवाद पर चर्चा नहीं कर सकते क्योंकि पैरा स्पेशल फोर्स का बैज मैरून रंग पर होता है, जिस पर 'बलिदान' लिखा होता है। इसलिए ऐसा कहना कि धोनी ने बलिदान बैज लगा रखा है यह बिल्कुल गलत है। 

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भारतीय सेना के बैज के नाम से उठा यह विवाद इतना बढ़ गया कि पाकिस्तान के नेताओं ने भी इस पर अपनी दिलचस्पी दिखाई और प्रतिक्रिया देने लगे। इमरान खान की सरकार में विज्ञान और तकनीकि मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने कहा कि भारतीय मीडिया पर जंग का खुमार इतना चढ़ा हुआ है कि इन्हें सीरिया, अफगानिस्तान और रवांडा में लड़ने भेज देना चाहिए। बलिदान बैज के निशान को देखकर इतना बौखला गए पाक मंत्री कि ट्वीट के जरिए कहते हैं कि धोनी इंग्लैंड क्रिकेट खेलने गए हैं न कि महाभारत। भारतीय मीडिया पर जंग का इतना खुमार चढ़ा हुआ है कि इन्हें सीरिया, अफगानिस्तान और रवांडा में लड़ने के लिए भेज देना चाहिए।

धोनी के दिल में भारतीय सेना

साल 2011 में वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को सेना को मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक दी थी। हालांकि वे ऐसा सम्मान प्राप्त करने वाले दूसरे कप्तान हैं। इससे पहले सेना ने यह सम्मान भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव को दिया था। इतना ही नहीं इसके बाद धोनी ने पैराट्रूपिंग की ट्रेनिंग ली और सभी पांचों छलांग लगाकर प्रतीक चिह्न लगाने की योग्यता प्राप्त की। 

दरअसल धोनी ने पैरा बेसिक कोर्स किया और आगरा के पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल में उन्होंने भारतीय वायुसेना के एएन-32 विमान से अपनी पांचवीं छलांग लगाई थी जिसके बाद उन्हें बैज लगाने का अधिकार प्राप्त हुआ। लेकिन सेना द्वारा सीधेतौर पर यह कह देना कि धोनी ने जो बैज लगाया हुआ है उसे बलिदान बैज कहना गलत है। इससे ग्लव्स में बैज को लेकर जारी विवाद समाप्त हो जाता है। हालांकि अब आईसीसी को भी इस बात को मान लेना चाहिए कि यह नियमों का उल्लघंन नहीं है और धोनी को इस तरह के चिह्न को लगाने की अनुमति प्रदान करना चाहिए। 

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