खाने के ही नहीं, लगाने के भी काम आता है पपीता

खाने के ही नहीं, लगाने के भी काम आता है पपीता

मिताली जैन | Apr 3 2019 7:34PM
पपीता एक ऐसा फल है जो हर मौसम में बेहद आसानी से मिल जाता है। वैसे तो आपने इसके सेवन से होने वाले लाभों के बारे में अवश्य सुना होगा, लेकिन क्या आप इसके ब्यूटी बेनिफिट्स से परिचित हैं। अगर पपीते का इस्तेमाल सही तरीके से किया जाए तो इससे स्किन की कई तरह की समस्याओं को बेहद आसानी से दूर किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−
एक्ने को अलविदा
अगर एक्ने ने आपको परेशान कर दिया है तो अब वक्त आ गया है उसे अलविदा कहने का। इसके लिए पहले आप आधा कप पका पपीता लेकर उसे अच्छी तरह मैश करें। अब इसमें एक चम्मच शहद, एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी डालकर मिक्स करें। अब इस पैक को चेहरे पर लगाकर करीबन 15 मिनट के लिए छोड़ दें। जब यह सूख जाए तो ठंडे पानी से चेहरा वॉश करें। आप तीन से चार दिन बाद इस पैक का इस्तेमाल कर सकती हैं।
 
मिलेगी ठंडक
अब जिस तरह दोपहर के समय गर्मी बढ़ रही है, उसे देखते हुए अक्सर स्किन में जलन होने लगती हैं। इसलिए अगर आप स्किन को सूदिंग इफेक्ट देना चाहती हैं तो थोड़ा सा पका पपीता लेकर उसे मैश करें। अब इसमें केला व खीरा डालकर अच्छी तरह ब्लेंड करें। जब एक स्मूद पेस्ट बन जाए तो उसे चेहरे व गर्दन पर लगाकर 15 मिनट के लिए छोड़ दें। अब पहले गुनगुने पानी से चेहरा साफ करें। उसके बाद ठंडे पानी से फेस वॉश करें। आप सप्ताह में एक बार इस पैक का इस्तेमाल अवश्य करें। 
दूर करे फाइन लाइन्स
उम्र बढ़ने के साथ−साथ स्किन की कसावट कम हो जाती है, जिससे फाइन लाइन्स व रिंकल्स की समस्या होती है। ऐसे में आप पपीते की मदद से स्किन को फिर से टाइटन कर सकती हैं। इसके लिए आधा कप पका पपीता लेकर उसे अच्छी तरह मैश करें। इसके बाद एक एग व्हाइट लेकर उसे अच्छे से फेंटे और दोनों को अच्छी तरह मिक्स करें। अब इसे अपने चेहरे पर लगाकर पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। अंत में पानी की मदद से स्किन को साफ करें। आप सप्ताह में एक बार इस पैक का इस्तेमाल कर सकती हैं। एग व्हाइट में मौजूद स्किन टाइटनिंग एंजाइम्स के कारण पोर्स सिकुड़ने लगते हैं, जिसके कारण फाइन लाइन्स व रिंकल्स कम होने लगते हैं।
 
मिताली जैन

रहना है हर खबर से अपडेट तो तुरंत डाउनलोड करें प्रभासाक्षी एंड्रॉयड ऐप


Disclaimer: The views expressed here are solely those of the author in his/her private capacity and do not necessarily reflect the opinions, beliefs and viewpoints of Prabhasakshi and do not in any way represent the views of Prabhasakshi.